मनुष्य को जीवन में जब कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है तब वह ज्योतिष, तन्त्र -मन्त्र, रत्न और जड़ी बूटियों का सहारा लेता है। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी बहुत सारी जड़ी का उल्लेख मिलता है जिनके धारण करने से जन्म कुंडली में स्थित ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर किया जा सकता है। आर्थिक कारणों से जब कोई व्यक्ति महंगे नाग धारण नहीं कर पाता है तो जड़ी धारण की जा सकती है। शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक प्राप्त की गयी जड़ी भी ग्रहों की निर्बलता या अशुभ प्रभाव को दूर करने में प्रभावी होती है। सूर्य ग्रह के लिए बेलपत्र की जड़, चन्द्र ग्रह के लिए खिरनी या खजूर की जड़, मंगल ग्रह के लिए अनंतमूल या नाग जिह्वा की जड़, बुध ग्रह के लिए विधारा की जड़, ब्रहस्पति ग्रह के लिए भृंगराज की जड़, शुक्र ग्रह के लिए अश्वगंधा की जड़, शनि ग्रह के लिए लाल चन्दन या सिंह पुच्छ की जड़, राहु ग्रह के लिए लाल व सफ़ेद चन्दन और केतु ग्रा के लिए अश्वगंधा की जड़ को उपयोग में लाया जाता है। जड़ी का प्रयोग करते समय यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि जिस जड़ी का प्रयोग किया जा रहा हो उससे सम्बंधित ग्रह, वार एवं नक्षत्र में उस रंग के धागे अथवा कपडे में जडी को बाँध लिया जाये। विधि पूर्वक और शुद्ध मन एवं विश्वास के साथ जड़ी का प्रयोग करने से मनुष्य के जीवन में प्रसन्नता, सफलता, सुख और शांति आने लगती है तथा बाधा एवं कष्टों का निवारण होने लगता है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष विद्या विशारद