स्नेह की छांव में ...
Author :
सदा
Blog :sada-srijan
Date: 8/22/2012 5:17:00 AM
आज पापा की तिथि मन रात से ही उन्हें अपने आस-पास महसूस कर रहा है ...
मेरी हर बात पर स्नेह से हां कहते और मुस्करा देते ...
बस उनकी वही चिर-परिचित मुस्कान है और पलकों पे नमीं ...
कुछ मेले बचपन के
ख्वाबों में अब भी चले आते हैं,
कुछ पलों के लिए
आकर पलकों पे ठहर जाते हैं
दिल को बेचैन हैं करते वो झूले जब
हम छोड़ के उंगली बाबा की
गुम हो जाते हैं
रोते हैं मिलने की फ़रियाद भी करते हैं
अश्कों के बीच उनको याद भी करते हैं
महसूस करते हैं उन्हें हर पल
सिर्फ़ महसूस ही कर सकते हैं उन पलों को ...
हर एक बात को हर एक याद को
साथ कर लेते हैं
और चल पड़ते हैं स्नेह की छांव में
धीमे कदमों से आहिस्ता - आहिस्ता ...