चांद की लोरी से .....
Author :
सदा
Blog :sada-srijan
Date: 7/11/2012 10:16:00 AM
दर्द की आंखों में सूनापन देखकर
अब जी घबराता नहीं
बस यह लगता था कि कहीं ये रो न दे
मेरी मायूसियों का चर्चा रहा
सारा दिन उसकी पलकों पे
कोई ख्वाब बह गया गया तो
कैसे संभाल पाएगी वह
....
कातिलों का शहर है नींद
जाने कितने ही ख्वाबों का कत्ल होता है
हर रात यहां
गवाही देने के लिए कोई नहीं आता
तारे सो जाते हैं चांद की लोरी से
सूरज जब तक पहरे पे होता है
कोई खामोशी के लिहाफ़ से
बाहर झांकता नहीं ...