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अंतरात्मा की आवाज! नई पहचान

Author : Rajeeva Khandelwal      Blog :Swatantra Vichar      Date: 6/20/2012 10:53:00 AM



Photo: http://janoktidesk.blogspot.in/

राजीव खण्डेलवाल:-
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अंततः अंतरात्मा की आवाज पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति का दोबारा चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इस प्रकार अंतरात्मा की आवाज की यह नई पहचान है। आपका याद होगा वर्ष 1969 में तत्कालीन     प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने कांग्रेस जिसे तत्समय ‘सिंडिकेट’ के नाम से जाना जाता था के अधिकृत उम्मीदवार डॉ. नीलम संजीव रेड्डी के विरूद्ध डॉ. वेंकट वराह गिरी को चुनाव में अंतरात्मा की आवाज पर उतारकर इलेक्ट्राल कॉलेज से जिताने की अपील की थी तब वेंकट गिरी को इलेक्ट्रोल कॉलेज के सदस्यों ने इस अंतरात्मा की अपील को स्वीकार कर उन्हे राष्ट्रपति के पद पर जिताकर निर्वाचित किया था। यह प्रथम अवसर था जब अंतरात्मा की आवाज का देशव्यापी व्यापक असर व प्रभाव दिखा। इसके बाद जब भी कोई अधिकारिक उम्मीदवार का विरोध करना होता है तब उसी पार्टी के लोग अंतरात्मा की आवाज पर उसका विरोध कर विरोधी उम्मीदवार को वोट देने की अपील करते है। अर्थात पूर्व में अंतरात्मा की आवाज का उपयोग चुनाव लड़ने के लिए या वोट डालने की अपील के लिये किया जाता था। अतः अंतरात्मा का अर्थ अधिकारिक स्थिति का सक्रिय विरोध। इसके पूर्व किसी भी व्यक्ति दल या दल ने अंतरात्मा की आवाज की शक्ति का उपयोग कर चुनाव लड़ने ने इंकार नहीं किया। जैसा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने इस आधार पर चुनाव लड़ने से इंकार किया है जो इस दृष्टिकोण से प्रथम होने के कारण ऐतिहासिक है।
डॉ. कलाम एक निर्विवादित योग्य एवं आम जनता के निकट के व्यक्ति थे इसलिए डॉ. कलाम का चुनाव पूर्व में निर्विरोध हुआ था। ममता बनर्जी द्वारा उनसे राष्ट्रपति का चुनाव पुनः लड़ने के मुद्दे पर बात करने के बाद मुलायम सिंह यादव से बात के बाद उनकी उम्मीदवारी की घोषणा ममता-मुलायम द्वारा की गई। बावजूद, पूर्व राष्ट्रपति को वह समर्थन नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। शायद उसका कारण ‘राजनीति’ ही थी। कुछ पार्टी सैद्धांतिक रूप से एक बार चुने गये व्यक्ति को दोबारा राष्ट्रपति बनाने के पक्ष में नहीं थी।  इसमें इस आशंका को बल मिलता है कि वास्तव में डॉ. कलाम ने ममता बेनर्जी को अपनी उम्मीदवारी की सहमति दी थी और यदि नहीं दी तो तत्काल उनके द्वारा मुलायम सिंह की प्रेस कांफ्रेस की धोषणा का खंडन क्यो नहीं किया गया सिवाय इस कथन के कि वे सही समय पर सही निर्णय लेंगे। इसके बावजूद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी ओर से कोई इच्छा व्यक्त नहीं की थी। कुछ लोग यह कह सकते है अंतरात्मा की आवाज को सुनकर मना करने के बजाय उत्पन्न परिस्थ्तियों का अंकगणित उनके विरूद्ध होने के कारण डॉ. कलाम ने चुनाव लड़ने से इंकार किया क्योंकि उनके द्वारा प्रथम उपलब्ध अवसर पर उक्त बयान जारी नहीं किया गया।
इसलिए उन लोगो को जिन्होने प्रारंभ में कलाम जैसे व्यक्ति को चुनाव में उतारने की बात कही उनसे सहमति लिये बिना व उनको चुनने वाले इल्लोक्ट्रोल कॉलेज के समर्थन की संभावनाओं का सही आकलन किये बिना उनके नाम की घोषणा कर अनावश्यक रूप से अपने राजनैतिक हित के लिए उन्हे विवादित बना दिया।
अतः भविष्य में इस बात का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए लाभ हानि के  दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय व्यक्तित्व को विवादित कर गोटियॉं चलाना न केवल एक राष्ट्रीय अपराध है बल्कि स्वस्थ राजनीति के विपरीत भी है।
(लेखक वरिष्ठ कर सलाहकार एवं पूर्व नगर सुधार न्यास अध्यक्ष है)

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