Woh Humsfar Tha – OST of the Pakistani Show “Humsafar”
Author :
Jaya
Blog :Miles to go...
Date: 5/8/2012 4:17:31 PM
तर्क़-ए-ताल्लुकात पे रोया न तू ना मैं,
लेकिन ये क्या कि चैन से सोया न तू ना मैं।
वो हमसफ़र था, मग़र उससे हमनवाई न थी
कि धूप-छाँव का आलम रहा जुदाई न थी।
अदावतें थी, तग़ाफुल था, रंजिशें थीं मगर
बिछड़ने वाले में सबकुछ था, बेवफ़ाई न थी।
काजल डारूँ कुरकुरा सुरमा सहा न जाए
जिन नैन में पी बसे दूजा कौन समाए
बिछड़ते वक़्त उन आँखों में थी हमारी गज़ल
गज़ल भी वो जो किसी को कभी सुनाई न थी।
कभी ये हाल कि दोनों में एकदिली थी बहुत
कभी ये मरहला जैसे कि आशनाई न थी।
मोहब्बतों का सफ़र इस तरह भी गुज़रा था
शिकस्त-आ-दिल थे मुसाफ़िर शिकस्त पाई न थी।