Elegy maa acharya sanjiv verma 'salil'
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 12-05-2013 04:09:00
'स्मृति-गीतमाँ के प्रति:संजीव*अक्षरों ने तुम्हें ही किया है नमनशब्द ममता का करते रहे आचमनवाक्य वात्सल्य पाकर मुखर हो उठे-हर अनुच्छेद स्नेहिल हुआ अंजुमनगीत के बंद में छंद लोरी मृदुलऔर मुखड़ा तुम्हारा ही आँचल धवलहर अलंकार माथे की बिंदी हुआ-रस भजन-भाव जैसे लिए चिर नवलले अधर से हँसी मुक्त मुक्तक हँसामौन दोहा हृदय-स्मृति ले बसागीत की प्रीत पावन धरोहर हुई-मुक्तिका ने विमोहा भुजा में गसालय विलय हो'
पूरा लेख पढ़ा
सत्ता सियासत और शक्ति धर्मपाल सिंह यादव आलेख : बी.पी. गौतम
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 11-05-2013 06:19:00
'डीपी यादव
(यह आलेख स्वतंत्र पत्रकार श्री बी.पी. गौतम का है. जो सत्ता सियासत और शक्ति को रेखांकित करता है ब्लाग सदस्य इस आलेख में प्रकाशित सामग्री के लिये उत्तरदाई नहीं हैं.. कोई तथ्यात्मक आपत्ति हो तो अवगत करावे )
बाहुबली और धनबली के रूप में कुख्यात धर्मपाल सिंह यादव
उर्फ डीपी यादव की पत्नी उमलेश यादव को पेड न्यूज का दोषी सिद्ध होने पर भारत
निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश की विधान सभा की'
पूरा लेख पढ़ा
कृति चर्चा: मानवीय जिजीविषा का जीवंत दस्तावेज ''मुझे जीना है'' आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 04-03-2013 10:03:00
'कृति चर्चा:
मानवीय जिजीविषा का जीवंत दस्तावेज ''मुझे जीना है''
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
*
(कृति
विवरण: मुझे जीना है, उपन्यास, आलोक श्रीवास्तव, डिमाई आकार, बहुरंगी
सजिल्द आवरण, पृष्ठ १८३, १३० रु., शिवांक प्रकाशन, नई दिल्ली)
*
विश्व की सभी भाषाओँ में गद्य साहित्य की सर्वाधिक लोकप्रिय विधा उपन्यास
है। उपन्यास शब्द अपने जिस अर्थ में आज हमारे सामने'
पूरा लेख पढ़ा
कोहिनूर: लुटेरा कौन है? : रीता विश्वकर्मा
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 28-02-2013 16:40:00
'कोह-ए-नूर
रीता विश्वकर्मा
दुनिया का बेशकीमती हीरा ‘कोहिनूर’ जो इस समय ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के मुकुट में जड़ा है, को 1850 में ब्रिटिश इण्डिया के तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी ने सिख शासक महाराजा रणजीत सिंह के 13 वर्षीय पुत्र और उत्तराधिकारी दलीप सिंह पर दबाव बनाकर हासिल कर इसे क्वीन विक्टोरिया को सौंपा था। कोहिनूर हीरा 106 कैरेट का है जो दुनिया के बड़े हीरे में से एक है। उसको'
पूरा लेख पढ़ा
अभिनव प्रयोग- उल्लाला गीत: जीवन सुख का धाम है संजीव 'सलिल'
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 06-02-2013 11:15:00
'अभिनव प्रयोग- उल्लाला गीत: जीवन सुख का धाम है संजीव 'सलिल' * जीवन सुख का धाम है, ऊषा-साँझ ललाम है. कभी छाँह शीतल रहा- कभी धूप अविराम है...* दर्पण निर्मल नीर सा, वारिद, गगन, समीर सा, प्रेमी युवा अधीर सा- हर्ष, उदासी, पीर सा. हरी का नाम अनाम है जीवन सुख का धाम है... * बाँका राँझा-हीर सा, बुद्ध-सुजाता-खीर सा, हर उर-वेधी तीर सा- बृज के चपल अहीर सा. अनुरागी निष्काम है जीवन सुख का धाम है... * वागी'
पूरा लेख पढ़ा
एक गज़ल का ज़न्म
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 28-01-2013 19:31:00
'मुद्दत हुई है
साथ निवाला लिये हुए !
माँ साथ में बैठी है दुशाला लिये हुए.!!
वो दौर देर रात तलक़ गुफ़्तगूं का दौर
लौटी ये शाम यादों का हाला लिये हुए !!
आंखों में थमें अश्क़ अमानत उसी की है
है मांगती दुआ जो माला लिये हुए ..!!
जा माँ गोद में, सर रख के सिसक ले -
क्यों अश्क़ गिराता है रिसाला लिए हुए !!
________________________________________________
05 जनवरी 2013 की शाम'
पूरा लेख पढ़ा
गणतंत्र दिवस, गीत: संजीव 'सलिल'
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 26-01-2013 12:24:00
'गणतंत्र दिवस पर विशेष गीत:
लोकतंत्र की वर्ष गांठ पर
संजीव 'सलिल'
*लोकतंत्र की वर्ष गांठ परभारत माता का वंदन... हम सब माता की संतानें, नभ पर ध्वज फहराएंगे.कोटि-कोटि कंठों से मिलकर'जन गण मन' गुन्जायेंगे.'झंडा ऊंचा रहे हमारा','वन्दे मातरम' गायेंगे.वीर शहीदों के माथे पर शोभित हो अक्षत-चन्दन...नेता नहीं, नागरिक बनकरकरें देश का नव निर्माण. लगन-परिश्रम, त्याग-समर्पण,पत्थर में भी'
पूरा लेख पढ़ा
मुक्तक : रूप की आरती संजीव 'सलिल'
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 21-01-2013 05:35:00
'मुक्तक
रूप की आरतीसंजीव 'सलिल'*रूप की आरती उतारा कर. हुस्न को इश्क से पुकारा कर. चुम्बनी तिल लगा दे गालों पर- तब 'सलिल' मौन हो निहारा कर..*रूप होता अरूप मानो भी..झील में गगन देख जानो भी.देख पाओगे झलक ईश्वर की-मन में संकल्प 'सलिल' ठानो भी..*नैन ने रूप जब निहारा है,सारी दुनिया को तब बिसारा है.जग कहे वन्दना तुम्हारी थी-मैंने परमात्म को गुहारा है..*झील में कमल खिल रहा कैसे.रूप को रूप मिल रहा'
पूरा लेख पढ़ा
गीत: आओ! आँख मिचौली खेलें... संजीव 'सलिल'
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 16-01-2013 09:20:00
'चित्र पर कविता रचें:
गीत:
आओ! आँख मिचौली खेलें...
संजीव 'सलिल'
*
जीवन की आपाधापी में,
बहुत थक गए, ऊब गए हम।
भूल हँसी, मस्ती, खुशियों को,
व्यर्थ फ़िक्र में डूब गए हम।
छोड़ें सारा काम, चलो अब
और न हम बेबस तन ठेलें,
आओ! आँख मिचौली खेलें...
*
टीप-रेस, कन्ना-कौड़ी हो,
कंचे, चीटी-धप मत भूलें।
चढ़ें पेड़ पर झूला डालें,
ऊंची पेंग बढ़ा नभ छू लें।
बात और की भी मानें कुछ,
सिर्फ न अपनी अपनी पेलें-
आओ! आँख'
पूरा लेख पढ़ा
मैथिली हाइकू : संजीव 'सलिल'
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 10-01-2013 06:06:00
'मैथिली हाइकू :
संजीव 'सलिल'
*
स्नेह करब
हमर मन्त्र अछि।
गले लगबै।
*
एहि दुनिया
ईश्वर बनावल
प्रेम सं मिलु।
*
सभ सं प्यार
नफरत करब
नs ककरा से।
*
लिट्टी-चोखा
मधुबनी-मैथिली
बिहार गेल।
*
बिहारी जन
भगाएल जात
दोसर राज।
*
चलि पड़ल
विकासक राह प'
बिहारी बाबू।
*
चलय लाग
विकासक बयार
नीक धारणा ।
*
हम्मर गाम
भगवाने के नाम
लsक चलय।
*
हाल-बेहाल
जनता परेशान
मंहगाई सं।
*
लोकतंत्र में
चुनावक तैयारी
बड़का बात।'
पूरा लेख पढ़ा
चार्ली चैप्लिन मेरी आत्म कथा अनुवाद : सूरज प्रकाश
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 09-01-2013 12:51:00
''
पूरा लेख पढ़ा
चित्र पर कविता: उल्लास
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 02-01-2013 03:54:00
'चित्र पर कविता:
उल्लास
इस स्तम्भ की अभूतपूर्व सफलता के लिये आप सबको बहुत-बहुत बधाई. एक से
बढ़कर एक रचनाएँ अब तक प्रकाशित चित्रों में अन्तर्निहित भाव सौन्दर्य के विविध आयामों को हम तक तक पहुँचाने
में सफल रहीं हैं. संभवतः हममें से कोई भी किसी चित्र के उतने पहलुओं पर नहीं लिख पाता जितने पहलुओं पर हमने रचनाएँ पढ़ीं.
चित्र और कविता की कड़ी में संवाद, स्वल्पाहार, दिल-दौलत, प्रकृति,'
पूरा लेख पढ़ा
भज गोविन्दम् (मूल संस्कृत, हिन्दी काव्यानुवाद, अर्थ व अंग्रेजी अनुवाद सहित) मूल रचना: जगद्गुरु आदिशंकराचार्य अनुवाद: संजीव वर्मा 'सलिल'
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 02-01-2013 02:48:00
'भज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढ़मते। संप्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति डुकृञ् करणे ॥१॥ गोविंद भजो, गोविंद भजो, गोविंद भजो रे मूरख मन। अंतिम पल में रक्षा न करेगा, केवल यह व्याकरण रटन॥१॥ हे मोह से ग्रसित बुद्धि वाले मित्र! गोविंद को भजो, गोविन्द का नाम लो, गोविन्द से प्रेम करो क्योंकि मृत्यु के समय व्याकरण के नियम याद रखने से आपकी रक्षा नहीं हो सकती है ॥१॥ O deluded minded'
पूरा लेख पढ़ा
भज गोविन्दम् (मूल संस्कृत, हिन्दी काव्यानुवाद, अर्थ व अंग्रेजी अनुवाद सहित) मूल रचना: जगद्गुरु आदिशंकराचार्य अनुवाद: संजीव वर्मा 'सलिल'
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 02-01-2013 02:47:00
'भज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढ़मते। संप्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति डुकृञ् करणे ॥१॥ गोविंद भजो, गोविंद भजो, गोविंद भजो रे मूरख मन। अंतिम पल में रक्षा न करेगा, केवल यह व्याकरण रटन॥१॥ हे मोह से ग्रसित बुद्धि वाले मित्र! गोविंद को भजो, गोविन्द का नाम लो, गोविन्द से प्रेम करो क्योंकि मृत्यु के समय व्याकरण के नियम याद रखने से आपकी रक्षा नहीं हो सकती है ॥१॥ O deluded minded'
पूरा लेख पढ़ा
माहिया गीत मौसम के कानों में --संजीव 'सलिल'
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 25-10-2012 13:10:00
'माहिया गीत
मौसम के कानों मेंसंजीव 'सलिल'*
*
मौसम के कानों मेंकोयलिया बोले,खेतों-खलिहानों में।*आओ! अमराई से
आज मिल लो गले,
भाई और माई से।*आमों के दानों में, गर्मी रस घोले,बागों-बागानों में---*होरी, गारी, फगुआ गाता है फागुन,बच्चा, बब्बा, अगुआ।*
प्राणों में, गानों में, मस्ती है छाई,दाना-नादानों में---*
Acharya Sanjiv verma 'Salil'
सलिल.संजीव@जीमेल.कॉम
http://divyanarmada.blogspot.com
http:'
पूरा लेख पढ़ा
कृति चर्चा:आम आदमी के दर्द के आलेख : सुमित्र के व्यंग्य लेख संजीव 'सलिल'
Author
: sanjiv verma
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 25-10-2012 13:06:00
'कृति चर्चा:
चर्चाकार: संजीव 'सलिल'
आम आदमी के दर्द के आलेख : सुमित्र के व्यंग्य लेख
*
व्यंग्य लेखन साहित्य की वह विधा है जो कालखंड विशेष की सामाजिक,
आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, पारिवारिक तथा वैयक्तिक विडम्बनाओं,
विसंगतियों, अंतर्द्वंदों व आडम्बरों के त्रासद-हास्यद पक्षों को उद्घाटित
कर दोगलेपन तथा पाखंड पर सीधा, तीखा किन्तु विनोदपूर्ण प्रहार करती है.
व्यंग्य कभी व्यष्टि'
पूरा लेख पढ़ा
कोलस्ट्रम : शिशु का हक है..
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 05-10-2012 17:07:00
'प्रोजेक्ट प्रोत्साहन एक छोटी सी कोशिश है.
8 सितम्बर 2012'
पूरा लेख पढ़ा
रूस,चीन और इस्राइल : डैनियल पाइप्स
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 27-08-2012 21:27:00
'.
हाल के दो घटनाक्रम –व्लादिमिर पुतिन की हाल की मध्य पूर्व की यात्रा और चीन की सरकार द्वारा इजरायल के कार्गो रेलवे प्रकल्प को आर्थिक सहायता दिया जाना इस क्षेत्र में गठबन्धनों के नये समीकरणों की ओर संकेत देते हैं।
मध्य पूर्व का प्रमुख शास्वत विभाजन अब अरब इजरायल पर आधारित होने के स्थान पर इस्लामवाद और गैर इस्लामवाद पर आधारित हो गया है जिसमें कि ईरान एक कोने पर है तथा इजरायल दूसरे कोने पर है'
पूरा लेख पढ़ा
फिल्म पत्रकारिता या पीआर पत्रकारिता पर बड़ी बहस फिल्म पत्रकारिता, पीआर पत्रकारिता नहीं - अजय ब्रह्मात्मज
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 27-08-2012 17:40:00
'मुंबई. फिल्म के पत्रकार फ़िल्मी सितारों से सवाल करते हैं और वे उनका
जबाव देते हैं. लेकिन मुबई प्रेस क्लब में 'फिल्म पत्रकारिता या पीआर पत्रकारिता'
पर परिचर्चा के दौरान मामला उलटा था. फ़िल्मी दुनिया की खबर पहुँचाने वाले पत्रकार
वक्ता के रूप में थे. उनसे सवाल पूछे जा रहे थे और बीच में कोई पीआरओ नहीं था. गरमागरम
बहस हुई और कुछ स्वीकारोक्तियां भी. फिल्म पत्रकारों ने अपना पक्ष भी रखा और बॉलीवुड,'
पूरा लेख पढ़ा
क्या बगदाद बाब तेहरान चले गये?
Author
: Girish Billore
Blog
: भारत-ब्रिगेड
Date
: 26-08-2012 20:08:00
'2003 में अमेरिका नीत आक्रमण के दौरान अमेरिका के रिपोर्टरों ने इराक के सूचना मंत्री को " "बगदाद बाब' का नाम दिया था ( ब्रिटिश उन्हें कोमिकल अली कहते थे) । वे अपनी नियमित प्रेस वार्ता में गलत प्रचार करते हुए इराकी सेना की प्रशंसा करते और शानदार कहानियाँ सुनाते कि उन्होंने किस प्रकार विदेशी आक्रमणकारियों को कुचल दिया जबकि वही आक्रमणकारी पर्दे पर उनकी ओर बढते नजर आते थे।
लगता है कि अब ईरान के'
पूरा लेख पढ़ा