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मीडिया को चाहिए हर रोज़ एक नया शिकार

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 22-05-2013 03:31:00

'विन्दु दारा सिंह की गिरफ्तारी की खबर ऐसी छाई कि मंगलवार को नरेन्द्र मोदी की दिल्ली यात्रा की खबर सामने आ ही नहीं पाई। कोलगेट, टूजी, सीबीआई वगैरह पीछे रह गए हैं।लद्दाख का मसला पिछले दिनों मीडिया पर छाया रहा, पर जब चीनी प्रधानमंत्री दिल्ली आए तो उसपर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पाकिस्तान का चुनाव एक दिन का रोमांच पैदा कर पाए। मीडिया के मुँह में रोमांच का खून लग गया है। जंगल के शेर की तरह उसे हर रोज़ और हर समय रोमांच से भरा एक शिकार चाहिए। बेशक यह किसी की साज़िश नहीं है, पर लगता है क(...)'

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कुछ विचार, कुछ समाचार

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 21-05-2013 12:38:00

'क्लिक करेंममता बनर्जी का सियासी सफरजनाधार वाली एक नेता या ग़रीबों की मसीहा. दयालु या तीखे तेवर वाली एक महिला. दबंग नेता या फिर तानाशाह. ईमानदार लेकिन भ्रष्टाचार की अनदेखी करने वाली एक शासक. क्लिक करेंममता की पहचान से जुड़े कई सवाल हैंबीबीसी हिन्दी में पढ़ें पूरा लेखकोलकाता के भद्रलोक का ममता से मोहभंग क्यों?तीसरे मोर्चे की सम्भावना प्रताप भानु मेहताहालांकि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही तीसरे मोर्चे की सम्भावना को खारिज करते हैं, पर देश की जनता विकल्प के बारे में सो(...)'

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पराजय-बोध से ग्रस्त भाजपा

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 20-05-2013 02:06:00

'कर्नाटक चुनाव के नतीजे आने के बाद पिछले हफ्ते लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि यह हार न होती तो मुझे आश्चर्य होता। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा के प्रति उनकी कुढ़न का पता इस बात से लगता है कि उन्होंने उनका पूरा नाम लिखने के बजाय सिर्फ येद्दी लिखा है। वे इतना क्यों नाराज़ हैं? उनके विश्वस्त अनंत कुमार ने घोषणा की है कि येद्दियुरप्पा की वापसी पार्टी में संभव नहीं है। पर क्या कोई वापसी चाहता है?उससे बड़ा सवाल है कि भाजपा किस तरह से ‘पार्टी विद अ डिफरेंस’ नज़र आना (...)'

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खेलों का कचूमर निकालते उसके सौदागर

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 19-05-2013 02:11:00

'स्पॉट फिक्सिंग सिर्फ क्रिकेट का मामला नहीं है। अब यह हमारे खून में शामिल हो गई है। जबसे आईपीएल शुरू हुआ है यह बेशर्मी से चीयर गर्ल्स के साथ नाचने लगी है। पिछले साल इन्हीं दिनों आईपीएल से जुड़े कुछ खिलाड़ियों पर स्पॉट फिक्सिंग के आरोप लगे थे। एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद पुणे वारियर्स के मोहनीश मिश्रा, किंग्स इलेवन पंजाब के शलभ श्रीवास्तव, डेकन चार्जर्स के टी. पी. सुधींद्र, किंग्स इलेवन पंजाब के अमित यादव और दिल्ली के अभिनव बाली को सस्पेंड किया गया था। जाँच के बाद टीपी सुधीन्द्र को ज(...)'

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अब दलदल में हैं मनमोहन

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 13-05-2013 02:20:00

'कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि पवन बंसल और अश्विनी कुमार को पद से हटाने का फैसला पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का संयुक्त निर्णय था केवल सोनिया गांधी का नहीं। इस स्पष्टीकरण की ज़रूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि मीडिया में इस बात का चर्चा था कि सोनिया गांधी के हस्तक्षेप से मंत्री हटे। आडवाणी जी ने अपने ब्लॉग में मनमोहन सिंह को उलहना भी दिया कि अब पद पर बने रहने के क्या माने हैं? बहरहाल इतना ज़रूर स्पष्ट हो रहा है कि विपक्ष का निशाना अब सीधे मनमोहन सिंह बनेंगे।पवन बंस(...)'

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आडवाणी जी का टेलपीस

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 12-05-2013 16:18:00

'आज भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कर्नाटक में भाजपा की पराजय पर अपने ब्लॉग में लिखा है कि मुझे इस हार पर विस्मय नहीं हुआ, बल्कि भाजपा जीतती तो विस्मय होता। उनका कहना है कि भाजपा ने नैतिक दृष्टि से भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया इसलिए यह पराजय हुई।उनके ब्लॉग का रोचक हिस्सा था उसका टेलपीस, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को उलाहना दिया था कि अब मंत्रियों को हटाने का फैसला भी ऊपर से होता है। इतनी ही नहीं सोनिया गांधी अब मंत्रिमंडल विस्तार के बारे में भी फैसले करेंगी। इस टेलपीस ने कांग्रेस(...)'

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आज़ादी चाहता है ‘पिंजरे में कैद तोता’

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 12-05-2013 05:39:00

'सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सरकार के पिंजड़े में कैद तोता ही नहीं बताया, उसकी आज़ादी का रास्ता भी साफ कर दिया है। रेलमंत्री पवन कुमार बंसल और कानून मंत्री अश्विनी कुमार को हटा दिया गया है। मंत्रियों का रहना या हटना मूल समस्या नहीं है। समस्या का लक्षण है। इन दोनों मंत्रियों के साथ दो अलग-अलग किस्म के मामले जुड़े हैं। पर एक साम्य है। वह है सीबीआई की भूमिका। पिछले हफ्ते सीबीआई को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सुप्रीम कोर्ट ने की है। उसने सरकार को प्रकारांतर से निर्देश दिया कि जाँच एज(...)'

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दिल्ली के येदियुरप्पा न बन जाएं मनमोहन

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 12-05-2013 05:06:00

'कर्नाटक ने कांग्रेस की मुश्किल घड़ी में बड़ी मदद की है। उसके डूबते जहाज को सहारा दिया है, बल्कि गहरी मूर्च्छा में पड़ी पार्टी को संजीवनी दी है। पर यह सब इतना ही है, इससे आगे नहीं। कांग्रेस कह रही है कि अब तो ट्रेंड सेट हो गया है, जो 2014 के चुनाव तक चलेगा। यह भी कहा जा रहा है कि यह कांग्रेस की नीतियों की जीत है। मनमोहन सिंह ने यह जीत राहुल गांधी को समर्पित की है और दिग्विजय सिंह ने हार का ठीकरा नरेन्द्र मोदी के सिर पर फोड़ा है। कांग्रेस नेता नारायणसामी के अनुसार नरेन्द्र मोदी ड(...)'

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अगला कौन?

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 11-05-2013 03:12:00

'हिन्दू में केशव का कार्टून15 नवम्बर 2010 ए राजा, टूजी7 जुलाई 2011 दयानिधि मारन, एयरसेल-मैक्सिस डील26 जून 2012 वीरभद्र सिंह, कारोबारी सौदों में घूसखोरी10 मई 2013 पवन कुमार बंसल और अश्विनी कुमार, रोलगेट और कोलगेटअगला कौन?सतीश आचार्य का कार्टून'

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कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के कुछ ‘गैर-कांग्रेसी’ कारण

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 10-05-2013 06:41:00

'ऊपर सतीश आचार्य का कार्टून नीचे हिन्दू में केशव का कार्टूनप्रमोद जोशीवरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिएप्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अनुसार कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के सूत्रधार हैं राहुल गांधीप्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अनुसार कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के सूत्रधार हैं राहुल गांधी. राहुल गांधी से पूछें तो शायद वे मधुसूदन मिस्त्री को श्रेय देंगे. या कहेंगे कि पार्टी संगठन ने अद्भुत काम किया.कांग्रेस संगठन जीता ज़रूर पर पार्टी अध्यक्ष परमेश्वरन खुद चुनाव हार गए. कमल नाथ(...)'

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एक माँ का अचानक खो जाना

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 10-05-2013 02:45:00

'प्रमोद जोशी साहित्य, संगीत, चित्रकला और रंगमंच पर ‘माँ’ विषय सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला विषय है। निराशा में आशा जगाती, निस्वार्थ प्रेम की सबसे बड़ी प्रतीक है माँ। जितना वह हमें जानती है हम उसे नहीं जानते। दक्षिण कोरिया की लेखिका क्युंग-सुक शिन ने अपनी अंतर्राष्ट्रीय बेस्ट सेलर ‘प्लीज लुक आफ्टर मॉम’ में यही बताने की कोशिश की है कि जब माँ हमारे बीच नहीं होती है तब पता लगता है कि हम उसे कितना कम जानते थे। सन 2011 के मैन एशियन पुरस्कार से अलंकृत इस उपन्यास का 19 भाषाओं में अनुवा(...)'

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इस स्टूडियो-उन्माद को भी बन्द कीजिए

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 06-05-2013 02:23:00

'अच्द्दा हुआ कि लद्दाख में चीनी फौजों की वापसी के बाद तनाव का एक दौर खत्म हुआ, पर यह स्थायी समाधान नहीं है। भारत-चीन सीमा उतनी अच्छी तरह परिभाषित नहीं है, जितना हम मान लेते हैं। दूसरे हम पूछ सकते हैं कि हमारी सेना अपनी ही सीमा के अंदर पीछे क्यों हटी? इस सवाल का जवाब बेहतर हो कि राजनयिक स्तर पर हासिल किया जाए। पिछले हफ्ते कई जगह कहा जा रहा था कि भारत सॉफ्ट स्टेट है। सरकार ने शर्मनाक चुप्पी साधी है। बुज़दिल, कायर, दब्बू, नपुंसक। खत्म करो पाकिस्तान के साथ राजनयिक सम्बन्ध। तोड़ लो च(...)'

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राष्ट्रगान के रिकॉर्ड बनाने से ज्यादा मिलकर काम करें

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 05-05-2013 12:19:00

'राष्ट्रगान के विश्व रिकॉर्ड बनाने से काम चलता हो तो भारत को सिर्फ चीन ही पछाड़ पाएगा, पर हमारी प्रतियोगिता पाकिस्तान से चल रही है। 6 मई को हमारे यहाँ नया विश्व रिकॉर्ड बनने जा रहा है। पर क्या इस विश्व रिकॉर्ड के बाद हमारा समाज ज्यादा समझदार, विवेकशील और कल्याणकारी हो जाएगा। हमें सबके लिए अच्छी शिक्षा, सबके लिए अच्छा स्वास्थ्य और सुशासन चाहिए। पर हमारे यहाँ एक के बाद एक खुलते घोटाले कुछ और कहानी कहते हैं। ठीक है राष्ट्रगीत गाइए, पर गीतों की भावना को जीवन में भी उतारिए। वर्ना यह सब पा(...)'

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छाती पीटने से नहीं होगी राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 05-05-2013 02:16:00

'सरबजीत के मामले में भारत सरकार, मीडिया और जनता के जबर्दस्त अंतर्विरोध देखने को मिले हैं। सरबजीत अगस्त 1990 में गिरफ्तार हुआ था और अक्टूबर 1991 में उसे मौत की सजा दी गई थी। इसके बाद यह मामला अदालती प्रक्रियाओं में उलझा रहा और 2006 में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा को बहाल रखा। इस दौरान भारतीय मीडिया ने उसकी सुध नहीं ली। सरबजीत की बहन और गाँव वालों की पहल पर कुछ स्थानीय अखबारों में उसकी खबरें छपती थीं। इसी पहल के सहारे भारतीय संसद में यह मामला पहुँचा और सितम्बर 2005 में प्रध(...)'

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कांग्रेस की राह के 11 रोड़े

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 03-05-2013 07:41:00

'प्रमोद जोशीवरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिएहिन्दू में सुरेन्द्र का कार्टूनमई 2009 में जब यूपीए-2 की सरकार आई तब लगा था कि देश में स्थिरता का एक दौर आने वाला है.सरकार के पास सुरक्षित बहुमत है. सहयोगी दल अपेक्षाकृत सौम्य हैं.इस घटना के कुछ महीने पहले ही मंदी का पहला दौर शुरू हुआ था. हमारी आर्थिक विकास दर 9 प्रतिशत से घटकर 6 प्रतिशत के करीब आ गई थी. पर उस संकट से हम पार हो गए. अन्न के वैश्विक संकट का प्रभाव हमारे देश पर नहीं पड़ा.नवम्बर 2009 में भारत ने इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड (...)'

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अमेरिका जाने का शौक है तो उसे झेलना भी सीखिए

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 03-05-2013 02:41:00

'अमेरिका के हवाई अड्डों से अक्सर भारतीय नेताओं या विशिष्ट व्यक्तियों के ‘अपमान’ की खबरें आती हैं। अपमान से यहाँ आशय उस सामान्य सुरक्षा जाँच और पूछताछ से है जो 9/11 के बाद से शुरू हुई है। आमतौर पर यह शिकायत विशिष्ट व्यक्तियों या वीआईपी की ओर से आती है। सामान्य व्यक्ति एक तो इसके लिए तैयार रहते हैं, दूसरे उन्हें उस प्रकार का अनुभव नहीं होता जिसका अंदेशा होता है। मसलन एक पाकिस्तानी नागरिक ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि मुझसे तकरीबन 45 मिनट तक पूछताछ की गई, पर किसी वक्त अभद्र शब्दों का इस्(...)'

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'नेता' का एजेंडा सेट कर गए मोदी

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 29-04-2013 11:48:00

'कर्नाटक में भाजपा ने नरेंद्र मोदी का बेहतर इस्तेमाल जान-बूझकर नहीं किया या यह पार्टी के भीतरी दबाव का परिणाम था? सिर्फ एक रैली से मोदी पार्टी के सर्वमान्य नए राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित नहीं होते.हाँ, वे प्रादेशिक नेता के बजाय राष्ट्रीय नेता के रूप में प्रकट ज़रूर हुए हैं. उससे ज्यादा बड़ी बात यह है कि उन्होंने मौका लगते ही ‘ताकतवर नेता’ की ज़रूरत को फिर से राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया है.पूरा लेख पढ़ें बीबीसी हिन्दी की वैबसाइट परसतीश आचार्य का कार्टूनहिन्दू में सुरेन्द्र (...)'

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Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 29-04-2013 02:32:00

'कोल ब्लॉक आबंटन की स्टेटस रिपोर्ट के मसले में कानून मंत्री और सीबीआई डायरेक्टर दोनों ने मर्यादा का उल्लंघन किया है। पर इस वक्त सीबीआई डायरेक्टर चाहें तो एक बड़े बदलाव के सूत्रधार बन सकते हैं। इस मामले में सच क्या है, उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। उन्हें निर्भय होकर सच अदालत और जनता के सामने रखना चाहिए। दूसरे ऐसी परम्परा बननी चाहिए कि भारतीय प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा तथा अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं के अफसरों को सेवानिवृत्ति के बाद कम से कम पाँच साल तक कोई नियुक्ति न मिले। भले ही इसके बदले उ(...)'

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चीनी रिश्तों की जटिलता को समझिए

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 28-04-2013 02:56:00

'भारत और चीन के बीच जितने अच्छे रिश्ते व्यापारिक धरातल पर हैं उतने अच्छे राजनीतिक मसलों में नहीं हैं। लद्दाख का विवाद कोई बड़ी शक्ल ले सके पहले ही इसका हल निकाल लिया जाना चाहए। पर उसके पहले सवाल है कि क्या यह विवाद अनायास खड़ा हो गया है या कोई योजना है। हाल के वर्षों में चीन के व्यवहार में एक खास तरह की तल्खी नज़र आने लगी है। इसे गुरूर भी कह सकते हैं। यह गुरूर केवल भारत के संदर्भ में ही नहीं है। उसके अपने दूसरे पड़ोसियों के संदर्भ में भी है। जापान के साथ एक द्वीप को लेकर उसकी तनातनी (...)'

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चीनी घुसपैठ गम्भीर है, चिंतनीय नहीं

Author : pramod joshi      Blog : जिज्ञासा      Date : 28-04-2013 02:48:00

'चीनी के साथ हमारा सीमा विवाद जिस स्तर का है उसके मुकाबले पाकिस्तान के साथ विवाद छोटा है, बावजूद इसके चीन के साथ हमारे रिश्तों में वैसी कड़वाहट नहीं है जैसी पाकिस्तान के साथ है। बुनियादी तौर पर पाकिस्तान का इतिहास 66 साल पुराना है और चीन का कई हजार साल पुराना। वह आज से नहीं हजारों साल से हमारा प्रतिस्पर्धी है। यह प्रतिस्पर्धा पिछले कुछ सौ साल से कम हो गई थी, क्योंकि भारत और चीन दोनों आर्थिक शक्ति नहीं रहे। पर अब स्थिति बदल रही है। बेशक हमारे सीमा विवाद पेचीदा हैं, पर दोनों देश उन्हें(...)'

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