’आस्तिकों का प्याज़’
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 23-05-2013 00:00:00
'कल सुबह बैंक के लिये निकल रहा था, माताजी से बाय-बाय कहते ही सुनाई पड़ा, "आजकल लू बहुत चल रही है, जेब में एक छोटा सा प्याज रख ले।" आदत के हिसाब से मैंने नानुकर की तो समाचार सुन रहे पिताजी ने भी मेरे विपक्ष में अपना वोट डाल दिया। उपलब्ध प्याजों में से सबसे छोटा प्याज(जोकि इतना छोटा भी नहीं था), अपनी पेंट की छोटी सी जेब के हवाले करके मैंने कूच का नगाड़ा बजा दिया।
मेट्रो स्टेशन पहुँचकर बैग'
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समय का चक्र
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 24-04-2013 15:07:00
'(कोणार्क सूर्य मंदिर का एक चित्र, गूगल से साभार)
गाड़ी में उस दिन भाई साहब हमेशा की तरह बोल तो कम ही रहे थे लेकिन चेहरा कुछ ज्यादा ही उतरा हुआ था। मैंने पूछा तो कहने लगे, "अब आप लोगों के साथ शाम का साथ छूट जायेगा। गरीबी रेखा से नीचे वाले लोगों का सर्वे शुरू हो रहा है, मेरी भी ड्यूटी'
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अपने पराये
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: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 16-04-2013 13:01:00
'वापिसी में जब कभी गाड़ी देर से आ रही होती तो हमारे एक साथी को चाय की तलब लग जाती थी। हम लोग प्लेटफ़ार्म पर ही स्थित टी-स्टाल पर चले जाते थे। छोटे शहरों में नौकरी करने का सुख भी अलग ही होता है, लोग आईडेंटिफ़ाई करते हैं। स्टाल पर हमें देखकर ठेकेदार खुद मोर्चा संभाल लेता था और स्पेशल चाय विद मट्ठी पेश कर दी जाती थी। सबसे पहली बार तो उसने पैसे लेने से भी मना कर दिया। बहुत झिकझिक हुई, आखिर में उसे'
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स्टिंग ऑपरेशन
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 07-04-2013 07:18:00
'(एक निम्न मध्यमवर्गीय एकल परिवार के स्टिंग ऑपरेशन का नाट्य रूपांतरण)
"इतवार के दिन भी घर की समस्याओं की तरफ़ ध्यान मत देना, तुम्हारे किताबों में सिर छुपा लेने से जैसे सब काम अपने आप हो जायेंगे। बच्चों के स्कूल खुल गये हैं। इस बार तीन महीने की फ़ीस जानी है, नई वर्दी और किताबें लानी हैं लेकिन तुम्हें इन सबसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। पिछले महीने का मकान का किराया नहीं दिया अब तक। मकान मालकिन'
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अलग-अलग
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 01-04-2013 18:52:00
'जासूस ने जब बताया था कि सामने वाली फ़ौज गिनती में अपनी फ़ौज से कम से कम पांच गुना ज्यादा है, तबसे दिमाग में उधेड़बुन चल रही थी। ऐसा न हो कि सैकड़ों मील घोड़ों की पीठ पर सफ़र करके यहाँ तक आना, रास्ते की मुश्किलें, जीती हुई छोटी बड़ी लड़ाईयाँ सब बेकार चली जायें। सिर झटककर वो अपने खेमे से बाहर निकला और मुकाम का मुआयना'
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जंगल कथा
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 22-03-2013 00:35:00
'(चित्र गूगल से साभार)
एक नन्हा, चंचल, उत्साही खरगोश कड़ी धूप में इधर उधर डोल रहा था। छाया का कहीं नामो निशान नहीं था। हाथी महाराज नहा धोकर मस्त मलंग की तरह सो रहे थे। धूप से त्रस्त नन्हें खरगोश ने उस विशालाकार वस्तु की परिक्रमा की और उसे एक मजबूत किला\ईमारत मानते हुये उस महल के पिछले दरवाजे में सिर'
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श्रद्धाँजलि.
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 15-03-2013 16:32:00
'आजीवन ऋणी रहेंगे तुम्हारे
श्रीनगर में हुये तेरह मार्च 2013 के फ़िदायीन हमले में शहीद पाँच
सी.आर.पी.एफ़. जवानों के नाम -
1. हुतात्मा कांस्टेबल ओम प्रकाश निवासी सिहोर, मध्य प्रदेश
2. हुतात्मा कांस्टेबल पेरुमल निवासी मधुरा, तमिलनाडु
3. हुतात्मा कांस्टेबल सुभाष सौरव निवासी रांची, झारखंड
4. हुतात्मा'
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दो बोरी..
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 02-03-2013 02:00:00
'ये वो समय था जब लगभग हर घर में कम्प्यूटर और हर हाथ में मोबाईल नहीं होते थे। अपने देश में तकनीक की हद वी.सी.आर. और वी.सी.पी. तक ही पहुँची थी। कुछ उच्च मध्यमवर्गीय परिवारों के पास अपने वी.सी.आर.\वी.सी.पी. थे और कुछ नीचे के पायदान के शौकीन लोग फ़िल्मों के शौक के लिये वीडियो-पार्लर वालों पर निर्भर थे क्योंकि पूरे परिवार को साथ लेकर सिनेमा हॉल तक जाना भी सबके लिये संभव नहीं होता था। रात भर के लिये'
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धुंधली सी धुंध.....कहानी.(समापन)
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 21-02-2013 13:30:00
'भाग एक
हाथ पर और घुटने पर लगी खरोंचों को
देखकर कहने लगे, "पुत्तर, बचाव हो गया। केहड़े पिंड जाना है?" अब आगे.....................
मैंने बताया तो पूछने लगे कि किसका लड़का हूँ? मैंने बताया, "बापूजी,
मैं यहाँ का रहने वाला तो हूँ नहीं। नौकरी के सिलसिले में यहाँ रहता हूँ,
मेरे परिवार को आप नहीं जानते।" बारिश रुक चुकी थी लेकिन गीली सड़क पर कुछ
देर पड़ा रहा था, गीले कपड़ों के कारण ही शायद सिहरन'
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धुंधली सी धुंध (कहानी)
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 20-02-2013 13:08:00
'(चित्र गूगल से साभार)
दरवाजा पीटे जाने की आवाज से आँख खुली। देखा तो रोशनदान से छनकर आती
धूप के चलते बंद कमरे में भी भरपूर उजाला हो रहा था। कुछ देर तो आँखें
खोलकर वैसा ही निष्चेष्ट लेटा रहा, लेकिन बाहर खड़े बग्गे ने फ़िर से
दरवाजा पीटा और हाँक लगाने लगा, ’साब'
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मेंहदी...
Author
: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 14-02-2013 00:30:00
'हमारा एक पुरानी साथी भोला उसके गाँव के एक आदमी के बारे में बता रहा था कि वो हमेशा अपनी गर्दन झुकाये रहता था। हमने अपना ज्ञान झाड़ा कि हो सकता है उन साहब ने यह तजुर्बा ले रखा हो -
नज़र बाग में नज़र मिलाते, नज़र से हमने नज़र को देखा
नज़र पड़ी जब नज़र के ऊपर, नज़र झुकाते नज़र को देखा
वाह वाह करनी तो दूर रही, भोला ने हमारी दलील यह कहकर खारिज कर दी कि ’गर्दन’ और ’नज़र’ विच फ़र्क हुंदा है। और खुलासा'
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पहचान
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: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 04-02-2013 00:30:00
'बात पुरानी ही है, हजारों साल पुरानी न सही लेकिन हजारों दिन पुरानी तो होगी ही। हमारे एक बॉस हुआ करते थे, अभी तो रिटायर्ड लाईफ़ बिता रहे हैं। दिल के बहुत वड्डे, कर्मठ, उत्साही, जुगाड़ी। बॉसपना छूकर नहीं गया था उन्हें, सब सहकर्मियों के साथ मित्रवत व्यवहार ही रखते थे । स्वभाव की बात करें तो अपने से एकदम उलट थे, हम न मदद लेने में यकीन रखने वाले न मदद देने में और वो आधी रात को भी कोई साथी फ़ोन कर देता'
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बिना शीर्षक
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: संजय अनेजा
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 21-01-2013 17:05:00
'भोजनावकाश से पहले का पीरियड अंग्रेजी का होता था। चौधरी सर हमेशा की तरह हाथ में लचीली सी संटी, जिसे हम लोग उस पीरियड में ’रूल’ बोलकर अपने अंग्रेजी का अभ्यास पैना करते थे। वैसे तो ’रसरी आवत जात से सिल पर पड़त निसान’ की तर्ज पर एक कहावत ’संटी आवत जात से .......निशान’ की खोज, आविष्कार, निर्माण हम उस प्राईमरी की कक्षा में कर चुके थे क्योंकि संटी और हमारे शरीर के स्थान विशेष के बीच ’आन मिलो सजना’'
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Tools of your trade....टूल्स ऑफ़ युअर ट्रेड...
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: संजय @ मो सम कौन ?
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
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: 06-01-2013 10:25:00
'कुछ दिन पहले स्टीवन सीगल की एक फ़िल्म देखी। फ़िल्म में कभी आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़ा लेकिन फ़िलहाल उस शहर से दूर रहने वाला नायक स्टीवन अपनी बेटी के कातिल का पता लगाने के लिये शहर में लौटता है और सुराग ढूँढने में अपनी बेटी के शरीफ़ से मंगेतर(जोकि नायक के प्रतिद्वंदी\जानी दुश्मन का बेटा भी है) की मदद लेने के लिये उसे कन्विंस करता है। असली कातिल की तलाश करते करते एक सूत्र उनके हाथ आता है और सही'
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अपील
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: संजय @ मो सम कौन ?
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
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: 31-12-2012 20:27:00
'देश के हर नागरिक को गरिमामय जीवन बिताने का अधिकार है और बलपूर्वक या छलपूर्वक इस अधिकार का कोई हनन करे तो यह अन्याय है। इस अन्याय को रोका जा सके, ऐसी अपेक्षा रखना हम नागरिकों का अधिकार भी है और कर्तव्य भी।
इस देश के एक आम नागरिक की हैसियत से मैं प्रशासन, न्यायपालिका और
कार्यपालिका से अपील करता हूँ कि स्वयंसिद्ध जघन्य'
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ये आना भी कोई आना है फ़त्तू?....
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: संजय @ मो सम कौन ?
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
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: 15-12-2012 08:16:00
'फ़त्तू और उसके उस्ताद जी जाने कितने दिनों से बीहड़ जंगल में घूम
रहे थे। चलते चलते उस्तादजी थक जाते तो दोनों बैठ जाते, उस्तादजी को भूख
लगती तो उनके समझाये अनुसार फ़त्तू पेड़ों से कोई फ़ल तोड़ लाता और उस्तादजी को
खिलाने के बाद खुद खा लेता। ऐसे ही प्यास लगती(उस्तादजी को ही यार, समझ जाया करो)
तो पत्तों का दोना बनाकर पानी भर लाता। गरज ये कि उस्तादजी का अनुभव और
फ़त्तू की जवानी वाली मिलीजुली सरकार'
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अकहानी.
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: संजय @ मो सम कौन ?
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 07-12-2012 09:55:00
'"सबके सामने कमिश्नर साहब ने मुझे इतना डाँटा, सिर्फ़ आपकी लापरवाही के कारण। फ़ाईलों का गट्ठर साथ रख लिया लेकिन उन्होंने मौके पर जो रिपोर्ट माँगी, वही साथ लेकर नहीं गये।"
बड़े बाबू ने मिमियाते'
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ये बात तो सही है...
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: संजय @ मो सम कौन ?
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 28-11-2012 11:30:00
'"आपने सिगरेट पीना छोड़ा नहीं न अब तक? ये अच्छी चीज नहीं है, आपसे कितनी बार तो कह चुका हूँ।" कश्यप बोला।
"अरे यार, दिमाग खराब मत कर। है तो यहीं हापुड़ का और आप-आप कहकर बात करता है जैसे लखनऊ की पैदाइश हो तेरी। बराबर के दोस्त और फ़िर एक ही बेल्ट के बंदों से आप-जनाब वाली भाषा अपने से होती नहीं। फ़िर पैस्सिव स्मोकिंग से इतनी परेशानी है तो आने से पहले टेलीग्राम भेज दिया कर, हम कमरे से बाहर ही'
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फ़िर वही ...
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: संजय @ मो सम कौन ?
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 18-11-2012 17:52:00
'वृद्ध नगरसेठ ने महात्माजी के आगे हाथ जोड़कर निवेदन किया, "बाबा, मेरे इकलौते युवा पुत्र को सन्यास की दीक्षा देने की हामी भरकर आपने तो मेरे बुढ़ापे की लाठी छीन ली है। बिनती करता हूँ कि उसे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी संभालने की आज्ञा दें।"
महात्माजी कहने लगे, "भगतजी, मैंने तो उसे उतावलेपन में ऐसा निर्णय लेने से बहुत मना किया था लेकिन उसकी रुचि और उसके संस्कार देखकर मुझे उसे दीक्षा देना ही उचित'
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Bloggers' Deepawali
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: संजय @ मो सम कौन ?
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: मो सम कौन कुटिल खल ...... ?
Date
: 11-11-2012 14:31:00
'दीपावली की खिचड़ी
मंगल दीप जले
जलाओ दिए पर .....
धनतेरस और दीपावली पर्व हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं : अपने मन मंदिर में ज्ञान का दीप जलायें .....
अधर्म पर धर्म का विजय उत्सव- दीपावली आज भारत का'
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