ये शौक़ भी ... !!!
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 2/4/2013 7:22:00 AM
'मायने बदल जाते हैं हर बार, हर शब्द के जिन्दगी में कई बार कहते सुना आराम हराम हो गया :) सच पहेलियाँ बूझने की उम्र नहीं रही पर फिर भी लोगों को जाने क्यूँ पहेलियाँ बुझाने में ज्यादा आनन्द आता है सामने वाले का चैन उन्हें भाता जो नहीं किसी विधि हर लिया जाये बस नित नये तरीके अपनाना आदत में शामिल कर लिया तभी से पहेलियाँ बुझाने का नया शौक पाल लिया.... कुछ लोग हुनरमंद होते हैं लेकिन फिर भी अपना हुनर कभी भी कायदे के काम में नहीं लेते हमेशा बेक़ायदा हो हाजि़र हो जाते हैं किसी भी वक(...)'
Read full article
तो दूरी क्यूँ???
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 2/4/2013 6:59:00 AM
';;; जब भी मैं सोचती हूँतुमसे एक कदम दूर चली जाऊँगीदूरी मुझसे मन ही मनजाने कितने सवाल करतीपूछती वजह, कभी जिरह करतीजब अपनेपन का रिश्ता हैतो दूरी क्यूँ?मैं हर बार की तरह इस बार भीहो निरूत्तर वजह खोजने लगतीदूरी की सारे प्रयास विफल सच दूर होना इतना आसान नहीं होतामन तो हर छोटी बात पर भटक जाता है... पर उसे सही दिशा देने के लिएविवेक को साथ लेना ही पड़ता हैवर्ना इसके अभाव में हर साथ यूँ ही छूट जाता हैया राह भटक जाता है ......'
Read full article
जाने कितनी बार !!!
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 1/1/2013 10:17:00 AM
'जब से हालात बदले हैं हर पिता का मन मां की सोच का समर्थन करने लगा है ... कभी हँस कर टाल दिया करता था जो मन माँ की सोच को तुम तो नाहक ही चिंता करती हो वह अब बिटिया के जरा सी देरी पर अन्दर बाहर होता है ....शाम ढले जाने कितनी बार !!!'
Read full article
श्रद्धासुमन करें अर्पित !!
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 12/13/2012 5:18:00 AM
'चिर निद्रा में संगीत का सिताराहुआ है लीन !.... मौन सितार स्वर छेड़े कौन किससे कहे !... जब बजेगातारसप्तक वोयाद आएगा !... भीगे नयन श्रद्धासुमन करेंअर्पित बस !... दिल की बात जब हाइकू कहे गहराई से !... मान उनका शब्द रखते ये कहते हुये !...'
Read full article
हारकर भी ... !!!
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 11/24/2012 7:27:00 AM
'प्रेम को तुमजिंदगी बनाना तो सम्मान से !..... प्रेम जब भी खामोश होता है तो जता जाता है ! .... अपना दर्द छुपाया तो जाना ये कैसा होता है !... हारकर भी जो नहीं हारता हैवही विजेता !... जीत की भाषा सिर्फ अहसास से समझी जाती ! ...'
Read full article
दर्द की एक लकी़र !!!
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 11/20/2012 6:04:00 AM
'कुछ रहस्यों के पार शून्य सा हो जाता है मन टाल-मटोल करता भावनाओं की तुला पर एक नज़र डालकर अनदेखा कर जब भीएक खोजी दृष्टि डालता रिक्त स्थान की तलाश में पाता अभाव रिक्तता का ! अहसासों का !! सम्बंधों का !!!मन विषाद से भर उठता गले तक अटक जाते शब्द वहीं रह जाता बस मौन !... शिथिल कदमों की खामोश आहट को, सुनने वाला अपना व्यथित मन पीड़ामय हो सिसकियों को ज़ज्ब करता जब-जब कुछ गरम बूँदे नयनों की कटोरी से छलकती एक आह ! साथ बहती नरम से अहसासों कीदर्द की एक लकी़र बड़ी बेरह(...)'
Read full article
रश्मि प्रभा जी की पुस्तकें ... इंफीबीम पर !!!
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 11/9/2012 7:54:00 AM
'आप सब इनकी लेखनी से बखूबी परीचित हैं ... जी हां जिक्र है आज आदरणीय रश्मि प्रभा जी की पुस्तकों का जो उपलब्ध हैं एक साथ ... 40 प्रतिशत की विशेष छूट के साथ तो आइये मिलते हैं उनकी पुस्तकों से (1) शब्दों का रिश्ता ... शब्दों के बीच आम इंसान बहुत घबराता है!शब्दों का जोड़-घटाव उनके सर के ऊपर से गुजरता हैवे भला कैसे जानेंगे उनको-जिनके सर से होकर आँधियाँ गुज़रती हैं....(2) अनुत्तरित .... अनुत्तरित सवाल परिक्रमा करते हैं रूह की तरहचाहते हैं उत्तर का तर्पण पर जहाँ अपनी सोच (...)'
Read full article
रश्मि प्रभा जी की पुस्तकें .... इंफीबीम पर
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 11/9/2012 6:57:00 AM
'आप सब इनकी लेखनी से बखूबी परीचित हैं ... जी हां जिक्र है आज आदरणीय रश्मि प्रभा जी की पुस्तकों का जो उपलब्ध हैं एक साथ ... 40 प्रतिशत की विशेष छूट के साथ तो आइये मिलते हैं उनकी पुस्तकों से (1) शब्दों का रिश्ता ... शब्दों के बीच आम इंसान बहुत घबराता है!शब्दों का जोड़-घटाव उनके सर के ऊपर से गुजरता हैवे भला कैसे जानेंगे उनको-जिनके सर से होकर आँधियाँ गुज़रती हैं....(2) अनुत्तरित .... अनुत्तरित सवाल परिक्रमा करते हैं रूह की तरहचाहते हैं उत्तर का तर्पण पर जहाँ अपनी सोच (...)'
Read full article
अपनी ही मैं में ....
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 10/30/2012 7:42:00 AM
'दर्द आज़ अपनी ही पीड़ा को पीना चाहता है आँसुओं की शक्ल में सिसकियों का रूदन कब चिन्हित हुआ रूख़सार पर वो हतप्रभ है औ भयाक्रान्त भी इस आक्रोश पर सर्जक का आवेग बहा ले जाता हैअपनी ही मैं में बिना किसी की कोई बात सुने .... ज़बां का खामोश होना सारे प्रयासों को विफ़ल कर हर बार दाग देता अपने ही जि़स्म में अनेको शब्द बाण आहत हो मन खुद की शैय्या तैयार कर विचलित सा अंत की प्रतीक्षा में अनंत पलों का संहार कर विषादमय हो बस प्रतीक्षा करता है अंत की अनंत पलों तक'
Read full article
एक बांध सब्र का ...
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 10/4/2012 11:33:00 AM
'दर्द की भाषा कभी पढ़ी तो नहीं मैने बस सही है हर बार एक नये रंग में उसी से यह जाना है ये दर्द जब भी होता है किसी अपने को तो कई बार हमारी आंखों से भी बह निकलता है इसकी पीड़ा से जब व्याकुल होता है हमारा ही कोई स्नेही तो हम भी दर्द की अनुभूति करते हैं मन ही मन उसका पैमाना तय करते हैं ... लेकिन यह भी सच है अपने हिस्से का दर्द हमेशा खुद को ही सहना होता है तभी तो हर मन में होता है एक बांध सब्र का जिसमें होते हैं कुछ हौसलेकुछ उम्मीदें कुछ समझौते जिन्हें मजबूती देता है विश्वास जिससे बु(...)'
Read full article
जिंदगी की तरह ...
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 9/14/2012 5:05:00 AM
'किताबों में सिर्फ़ शब्द ही नहीं होते उन शब्दों के अर्थ जिन्दगी से होते हैं कुछ किताबें होती हैं बिल्कुल जिन्दगी की तरह कभी सुलझी कभी उलझी कभी भावनाओं में बहती हुई किताबों सा हमनशीं कोई नहीं होता कभी शिका़यत नहीं कभी बेरूखी नहीं जब तुमने चाहा वो तुम्हारे साथ हो लेती हैं बिना थके वर्क़ दर वर्क़ खुलती जाती हैं बिना किसी झुंझलाहट के ...'
Read full article
उसे पता था .. !!!
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 8/31/2012 5:00:00 AM
'जड़ों को विस्तार देती धरती ने कभी भी पेड़ को भार नहीं माना उसका विशालता से कभी नहीं सहमी उसे पता थाउसका साया आकाश है ... ..........................................प्रेम इस ढाई अक्षर ने कितनों की जिन्दगी के मायने बदल दिये जिनके पास यह होता है उनके पास एक विस्तृत आकाश होता है जिनके पास से यह चला जाता है उनके पास आंसुओं का पूरा सैलाब होता है ....'
Read full article
मन ...
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 8/29/2012 7:58:00 AM
'मन .. हमारे शरीर का एक ऐसा हिस्सा जिसे हम में से किसी ने नहीं देखा लेकिन हमारा शरीर पूरी तरह से इसके अधीन रहता है ... सारे क्रिया-कलापों का कर्ता-धर्ता यही है ... चंचल चपल हमेशा अपनी ही करने वाला अधीर सा यह मन किसी नटखट बालक की भांति प्रतीत होता है ... इसका बचपना कभी नहीं जाता पल में उदास तो पल में खुश कभी लम्बी उड़ान भरता और जा पहुँचता उनके पास जो सात समंदर पार हैं या मीलों की दूरियाँ हैं जिनके बीच कभी सबके बीच में रहकर भी तन्हा हो जाता बगल में कौन बैठा है ? उससे भी अंजान(...)'
Read full article
स्नेह की छांव में ...
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 8/22/2012 5:17:00 AM
'आज पापा की तिथि मन रात से ही उन्हें अपने आस-पास महसूस कर रहा है ... मेरी हर बात पर स्नेह से हां कहते और मुस्करा देते ... बस उनकी वही चिर-परिचित मुस्कान है और पलकों पे नमीं ... कुछ मेले बचपन केख्वाबों में अब भी चले आते हैं, कुछ पलों के लिए आकर पलकों पे ठहर जाते हैं दिल को बेचैन हैं करते वो झूले जब हम छोड़ के उंगली बाबा की गुम हो जाते हैं रोते हैं मिलने की फ़रियाद भी करते हैं अश्कों के बीच उनको याद भी करते हैं महसूस करते हैं उन्हें हर पल सिर्फ़ महसूस ही कर सकते हैं उन पलों को .(...)'
Read full article
ठहर जाओ दम भर के लिए :)
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 8/9/2012 11:01:00 AM
'मैंने कई दफ़ा चाहा उतार दूँ कर्ज तुम्हारी दुआओं काइन दुआओं ने मुझे कई बार मौत की आगोश में जाने से बचाया है जिन्दगी को यह कर्ज भले ही मंजूर हो पर सच कहूँ तो मेरी आत्मा इस कर्ज से मुक्ति पाना चाहती है ... तमन्नाओं का यूँ तो कोई लेखा-जोखा नहीं रहता किसी के पास पर जब तमन्ना जिन्दगी को जीने की होती है तो बस यही ख्याल आता है इस नश्वर जिन्दगी से इतना प्रेम किसलिए इसका अंत एक न एक दिन तो होना निश्चित है फिर ये भय कैसा कभी सड़क पर चलते हुए किसी अज्ञात वाहन की अनियंत्रित गति से(...)'
Read full article
कुछ की फितरत होती है ....
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 7/31/2012 4:43:00 AM
'कुछ असभ्य चेहरों ने लगा लिया है नक़ाब सभ्यता का हर चेहरे पर है चेहरा कई रूपों में मिलता है यह नक़ाब कुछ की कीमत चुकानी होती है कुछ को छीन लिया जाता हैकुछ विरासत में पा लेते हैं ... क़ायदा पढ़ने की चीज़ नहीं होती सिखाने की भी नहीं होती क़ायदा जब मन कहता है तभी बस करने को जी चाहता है किसी का ... बदलना यूँ तो आसान नहीं होता, कुछ बदलाव हालात करा देते हैं कुछ करते हैं समझौता खुद से पर कुछ की फितरत होती है बदल जाने की ... ...'
Read full article
कुछ बूंदे उम्मीद की !!!
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 7/16/2012 8:49:00 AM
'कुछ बूंदे उम्मीद की बरसी हैं बादलों से झगड़कर आईं हैं धरती पर प्यास बुझाने उसकी मिलकर माटी से हो गई हैं माटी सोंधेपन की खुश्बु जबलिपट गई गई झूम के बयार से सावन ने हथेली में लिया प्यार से उम्मीद की कुछ बूंदों को मेंहदी में मिलाकर रचा लिया जो हथेलियों को ...कुछ बूंदे उम्मीद की बरसी हैं किसान की आंखों सेबीज़ बो आया है धरती में अभिषेक उसका ये सफल होगा आने वाला कल शीतल होगा ...'
Read full article
चांद की लोरी से .....
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 7/11/2012 10:16:00 AM
'दर्द की आंखों में सूनापन देखकर अब जी घबराता नहीं बस यह लगता था कि कहीं ये रो न दे मेरी मायूसियों का चर्चा रहा सारा दिन उसकी पलकों पे कोई ख्वाब बह गया गया तो कैसे संभाल पाएगी वह .... कातिलों का शहर है नींद जाने कितने ही ख्वाबों का कत्ल होता है हर रात यहां गवाही देने के लिए कोई नहीं आता तारे सो जाते हैं चांद की लोरी से सूरज जब तक पहरे पे होता है कोई खामोशी के लिहाफ़ से बाहर झांकता नहीं ...'
Read full article
वर्ना लोग क्या कहेंगे ???
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 6/19/2012 9:43:00 AM
'तुम संवेदनशील हो बहुत अच्छा है हर कोई अपना मतलब सिद्ध कर लेता है गाहे-बग़ाहे तुम्हारी संवेदनाओं की छतरी में बारिश से बचने के लिए और तिलमिलाती धूप में थोड़ी सी छांव के लिए तुम आधे भीगने का आनंद लेकर उसे पूरा सूखा रखते हो जलती धूप में अपनी बांह की कोहनी तक बहते पसीने में भी उसे छांव के नीचे रहने का सुकून देते हो ... लेकिन जब तुम्हारी बारी आती है तो उसी सामने वाले को चक्कर आने लगते हैंगिरगिट की तरह रंग बदलकर छतरी बंद कर देता है और लाठी की तरह टेक बनाकर तुम्हारे कांधे का सहारा लेकर(...)'
Read full article
कितना फर्क होता है न ...
Author
: सदा
Blog
: sada-srijan
Date
: 6/5/2012 5:49:00 AM
'तुम्हारी खामोशी के बीचसन्नाटा घुटनों के बल चलते हुए जाने कब अपने पैरों पे खड़ा हो गया देख रहा था आपनी पारखी नज़रों से तुम्हारी मायूसी कोकभी तुम्हारी खिलखिलाती हँसी ने सन्नाटे को भी मुस्कराहटों के संग साझा किया था .... सन्नाटे ने पहली बार महसूस किया था हँसी की मधुरता को तभी तो आज फिर वह विचलित था कौन है वो ऐसा जिसने तुम्हें कैद कर लिया है उदास चेहरे के पीछे उसने देखा दीवारों को जिनसे रौनक गायब थी बिल्कुल तुम्हारे चेहरे की तरह कितना फर्क होता है न खिलखिलाती हँसी (...)'
Read full article