हम
Author
: Piyush k Mishra
Blog
: mera panna
Date
: 11/8/2012 8:03:00 AM
'हम धर्म को बचायेंगेदंगे करवाएंगेबेटे की शादीअपनी दीवाली(आई है लक्ष्मी)पैसे नहीं लाई?बहू को जलाएंगेनवरात्र चल रहे हैंकरो देवी की पूजाक्या? मर गया है बच्चा?कोई तो है डायनअफवाह उड़ायेंगेकोई लुट रहा है?हमें क्या है उस से?रात हो गयी हैहम तो सो जायेंगे'
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शहर और नदी
Author
: Piyush k Mishra
Blog
: mera panna
Date
: 9/25/2012 2:20:00 PM
'कितने ही लोग हैंशहर में मेरेमिलने किससे मगर मैं कहाँ जाऊं?किसी को तो मैं जानता नहीं हूँ(पहचानता मुझे भी कोई कहाँ है?)वो एक नदी थीउत्तर दिशा में शहर के घाट पर जिसके, बचपन में मैंबैठा रहता था घंटोंवो मेरे पैरों को गुदगुदाती थी,खेलती थी, बहती रहती थीमगर अब वहाँ भी शहर हैजो मुझसे बात नहीं करता(वो मुझको जानता नहीं ना)सुनता हूँ नदी है अब भी वहीँउत्तर दिशा में, शहर के.जानता हूँ वो होगी(नाला शहर का आखिर जाता कहाँ है?)'
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Author
: Piyush k Mishra
Blog
: mera panna
Date
: 8/24/2012 5:14:00 AM
'मुझसे मिलने आओगे?किसकी लाज बचाओगे?बाँध के पट्टी आँखों परदुनिया से छुप जाओगे?क्या है जिसको खो दोगे?क्या है जिसको पाओगे?ये बहरों की बस्ती हैइनको गीत सुनाओगे?'
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Author
: Piyush k Mishra
Blog
: mera panna
Date
: 8/24/2012 5:12:00 AM
'काश कुछ ऐसा भी होतुम मुझे सोचा करोसब कहें झूठा मुझेतुम तो ऐसा ना कहोमानना ना माननाबात मेरी सुन तो लोकोई शय भाती नहींक्या हुआ है इन दिनोंलो चला जाता हूँ मैंचलो तुम ही खुश रहो'
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संसद में एक दिन
Author
: Piyush k Mishra
Blog
: mera panna
Date
: 8/20/2012 3:38:00 PM
'-"टाट्रा..." विपक्ष के नेता ने बोलना शुरू किया."ये नहीं कह सकते" संसद में शोर होने लगा.-"वी. के. सिंह...""नहीं नहीं नहीं...."- "इटली...""असंवैधानिक भाषा है"-"कोयला, जंगल....""बिलकुल नहीं.."-"रिपोर्ट....""नहीं बोल सकते"-"मदेरणा, सिंघवी, तिवारी, कांडा....""संसद की गरिमा का ख्याल कीजिये"-"भरतपुर,कोकराझार...""देश में अशांति फैलाने कि कोशिश कर रहे हैं आप"-"बंगलौर, पुणे, अहमदाबाद....""अफवाह मत फैलाइये"-"पाकिस्तान,हिंदू..""साम्प्रदाइक बातें नहीं हो सकती यहाँ"-"लोकपाल, सिविल सोसाइटी...""लोक(...)'
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सुबह की सैर
Author
: Piyush k Mishra
Blog
: mera panna
Date
: 8/17/2012 11:15:00 AM
'हम सुबह की सैर के लिए पार्क में पहुंचे ही थे कि किसी ने पीछे से आवाज़ लगाई-" क्या पीयूष बाबू कैसे हैं?" मैंने मुड कर देखा तो 'नेताजी' दांत निपोरे खड़े थे. नेताजी को देखते ही एकदम से गणेश जी याद आते हैं. आपको कुछ मिल रहा हो या नहीं मगर हाथ हमेशा आशीर्वाद की मुद्रा में रखेंगे.दूसरा हाथ हमेशा लड्डू खाने को तत्पर.सर बडा सा और उस से कई गुना बड़ा पेट.आजकल इनकी ही पार्टी की सरकार है इसीलिए दांत निपोर रहे थे.हमने सोचा कि ये हमारा इंटरव्यू लें इस से पहले ही हम इन्हें चुप करा देते हैं. हमने त(...)'
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बड़ा शहर
Author
: Piyush k Mishra
Blog
: mera panna
Date
: 7/30/2012 10:00:00 AM
'"कहाँ जा रहे हो?" घर से निकलते ही किसी ने आवाज़ दी और अपना मिजाज़ खराब. अब उन 'पडोसी' साहब को मुस्कुराते हुए बताओ की भाई यूँही ज़रा बाज़ार जा रहे थे. बड़े शहरों में ये नखरे नहीं हैं. वहाँ कोई कभी नहीं पूछता "कहाँ जा रहे हो?" " दो दिन से दिखे नहीं कहीं गए थे क्या?" "कल घर पर कौन आई थी, फ्रेंड है क्या?" और भी जाने क्या क्या.बड़े शहरों में बड़े आज़ाद ख्याल लोग रहते हैं.उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि "कल आपको देखा था बाजार में सिगरेट थी आपके हाथ में !" हाँ ये सब आज़ादी होते हुए भी अपना '(...)'
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आखिरी खत
Author
: Piyush k Mishra
Blog
: mera panna
Date
: 7/28/2012 3:10:00 PM
'लाल स्याही सेतुम्हारे नाम लिखाएक अधूरा खत-"गुलमोहर के पेड़ों परजब फूल आते हैं-तुम बहुत याद आते हो..."गुलमोहर के पेड़ों परजब फूल आते हैंतुम बहुत याद आते हो !'
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ए नेताजी
Author
: Piyush k Mishra
Blog
: mera panna
Date
: 5/6/2012 9:22:00 AM
'काम बड़ा ई नीक करईनी रऊआ ए नेताजीगाँव में नइखे पानी लेकिन मिलेला पऊआ ए नेताजीचाउर दाल में कंकर बा त कऊनो बात ई नइखेदांत टुटल बा सारा पर बाचल बा चऊआ ए नेताजीइस्कूल में मास्टरजी आके भी का कर लीहेंहोई त नऊआ के बेटा तब्बो नऊआ ए नेताजीकऊनो कुछ हेराई तब्बे कुछ कऊनो पायी भूख से कऊनो मरी तब्बे कुछ खाई कउआ ए नेताजी पढ़ा-लिखा के केतना ऊपर पहुंचा देहनी ओकरा इस्कूल के खिचड़ी खा के काल्हे बचल न बऊआ ए नेताजी'
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