अब हम सब कुछ हैं बस अब हम प्रेमी नहीं रहे...
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: kanupriya
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 22-05-2013 04:26:00
' तुम और हम दो ध्रुवो की तरह दोनों पर ज़िन्दगी टिकी हुई नहीं हम नदी के दो किनारे नहीं जो साथ न होकर भी साथ ही हो हम तो विज्ञान की पूरी किताब है न्यूटन के क्रिया प्रतिकिया के सिद्धांत की तरह जितनी तेज़ी से क्रिया होती है उतनी ही तेजी से प्रतिक्रिया एक दम नपे तुले कितने प्रेम में कितनी मुस्कराहट मिलनी है कितने गुस्से में कितनी सहनशीलता सब निर्धारित है कुछ भी अचानक नहीं कुछ भी अनिर्धारित नहीं हम सारा भूगोल है नदियों तालाबों की तरह अपना स्थान बदलते हुए पर पहचान&nb(...)'
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साथ नहीं छोडूंगी मैं तन्हाई में
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 15-05-2013 10:54:00
'कैरी की चटनी के जैसा खट्टा मीठा जीवन है खरबूजे के पन्ने की तरह स्वाद बदलता मौसम है तुम शक्कर जैसे मीठे , मैं नमक सी खारी हूँ तुम रूककर थमकर चलते मैं बहने की तैयारी हूँ तुम आते रहना ख्वाबों में, मैं सारा जहाँ भुला दूंगी तुम जब गुस्सा कर लोगे मैं भोलापन बिखरा दूंगीतुम हाथो में रखना एक छड़ी मुसीबतें भगाने को और मैं बचपना साथ रखूंगी ढेर मुसीबत लाने को तुम थक जाना शाम ढले तक आवारा बादल जैसे मैं रख लुंगी छुपाकर तुम्हे आँखों के काजल जैसे जब संघर्षों में आँख तुम्हारी हो जाए पथ(...)'
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भूख बस एक आवाज़ सुनती है रोटी की आवाज़
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 24-04-2013 13:16:00
'वो पकड़ता है वो रुपैये भीचकर मुट्ठी मेंसोचता है दे मारू मुनीम के मुह पर अभी कर दू हड़ताल और मांगू अपने हिस्से के पूरे पैसे फिर याद आता है ठंडा पड़ा चूल्हा ,रोटी और नमक का भाव घर में भूखे बैठे बीमार माँ बाप और तभी उसकी क्रांति के लाल और काले झंडे बदल जाते है शांति के सफ़ेद कबूतरों में और वो भींच लेता है उन रुपयों को हाथों में जोर से वो सोचती है अभी गाली दू कहु "दे मेरे हिस्से के सारे (...)'
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क्या तुम सुनते हो
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 23-04-2013 05:42:00
'ये कविता शुरू किसी अन्य भाव से हुई थी ख़तम दुसरे भाव पर हुई . कोई फेरबदल न करते हुए इसे पोस्ट कर रही हूँ आशा है दोनों भाव पाठको तक पहुंचेंगेतुम नर्तन के अनन्य भक्त से मुझको जीवन नाच नचाए जितना ज्यादा गहरा उतरु उतना फंदा कसता जाए तुम वैभव के स्वामी हो मैं अंधियारे का बंधक सा तुम कनक कंचन के रखवाले मैं अकिंचन बंजर मरघट सा तुममे सारा जगत समाया मुझमे एक रोटी की भूख तुम प्रसादों में रहने वाले मुझे टूटी छत का भी द(...)'
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जीव हत्या :धर्म की रोटी से बोटी मत तोडिये
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 01-04-2013 08:44:00
'गौ हत्या को लेकर हमेशा से तरह तरह के विवाद उठते रहे हैं कई संगठन और व्यक्ति समय समय इस मुद्दे अपनी बात रखते रहते है और विराध किया भी जाना चाहिए क्योंकि किसी भी जीव की हत्या किया जाना मानवीय और नैतिक रूप पूरी तरह सही है।सामान्य तौर पर देखा जाए तो हमेशा से ये लड़ाई कभी धर्म या कभी शाकाहार -माँसाहार के मुद्दे के नाम पर लड़ी जाती रही है या अपनी धार्मिक रीतियों का और पूजा इबादत का हवाला देकर गौ हत्या सम्बन्धी तर्क रखे जाते रहे हैं . सरसरी तौर पर देखा जाए तो तो ये सारे तर्(...)'
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इश्क यादें और उदासियाँ
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 16-03-2013 21:46:00
'म्यूट का बटन सिर्फ टीवी में ही नहीं ज़िन्दगी में भी बड़ा ज़रूरी होता है सारी चिल्लपों से दूर थोड़ी देर शांति के लिए , उदासियों से मोहब्बत करने के लिए .... उदासियाँ कभी भी आ सकती हैं दबे पैर ,किसी ख़ुशी के मौके पर ,दर्द की घड़ी में कभी भी क्यूंकि इनके लिए कभी कोई समय बनाया ही नहीं गया सब अच्छी चीजों की फ़िक्र में साज संभाल में इनके लिए कोई जगह बनाई ही नहीं गई और जिसके लिए जगह न बनाई गई हो न मिलने का समय दिया गया हो वो अतिक्रमण करके आता है ...उदासियों की कहानी &nb(...)'
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इश्क यादें और उदासियों का रंग
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 16-03-2013 21:12:00
'म्यूट का बटन सिर्फ टीवी में ही नहीं ज़िन्दगी में भी बड़ा ज़रूरी होता है सारी चिल्लपों से दूर थोड़ी देर शांति के लिए , उदासियों से मोहब्बत करने के लिए .... उदासियाँ कभी भी आ सकती हैं दबे पैर ,किसी ख़ुशी के मौके पर ,दर्द की घड़ी में कभी भी क्यूंकि इनके लिए कभी कोई समय बनाया ही नहीं गया सब अच्छी चीजों की फ़िक्र में साज संभाल में इनके लिए कोई जगह बनाई ही नहीं गई और जिसके लिए जगह न बनाई गई हो न मिलने का समय दिया गया हो वो अतिक्रमण करके आता है ................उदासियों की क(...)'
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लव थेरेपी बेस्ट थेरेपी
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 11-03-2013 12:09:00
'love therapy best therapy प्रेम लिखने पढने समझने के सबके अलग ढंग है ... पंजाब की हाथ की बनी फुलकारी का काम देखा है कभी ? या मेहंदी के कोन से बनी मेहंदी की डिजाइन तो देखी होगी ? सोचते हो इसमें नया क्या है अलग क्या है ? अलग है नया भी है ...अलग है हाथ का जादू , अलग अलग हाथ से बनी एक ही कलाकृति कभी एक सी नहीं दिखती और अलग अलग लोग उसे अलग ढंग से देखेंगे बस यही एक फर्क है इश्क के मामले में भी ...सब अलग ढंग से समझते है ,अपने ढंग से मायने निकालते है और बदलते (...)'
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ये शहर पराया लगता है
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: kanupriya
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 18-02-2013 11:09:00
'अपनी बिखरी यादों का हर ज़र्रा हमसाया लगता है जब याद तुम्हारी आती है ये शहर पराया लगता है वो लम्हे जो पीछे छूट गए वो अपने जो हमसे रूठ गए वो गाँव जो हमने देखे ना वो शहर जो आकर बीत गए सपनो की दुनिया में उनका मंच सजाया लगता है जब याद तुम्हारी आती है ये शहर पराया लगता है वो बरखा जो तुमसे सावन थी सर्दी की धूप जो मनभावन थी वो बसंत जो मन का मीत बना वो फागुन जो संगीत बना मन को ना भाए कुछ भी ,हर मौसम बोराया लगता है जब याद तुम्हारी आती है ये शहर पराया लगता है वो कलियाँ जो हमको प्यारी थी जि(...)'
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बेटियों की शादी और मायका
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: kanupriya
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 06-02-2013 18:31:00
'मायका यानी माँ का घरससुराल यानी पति का घरबड़ा दोहरापन है जिंदगियों मेंबचपन से लेकर शादी तकहर लड़की को एक पराये -अपने घरका दिया जाता है आश्वासनघर जो एसा होगा जहा वोना पराया धन होगी ना परायी अमानतना उसे वहा से कही जाना होगान अपने अस्तित्व का संघर्ष करना होगाक्युकी वो उसका अपना घर होगापर उस घर में जाने के बादउसे अहसास होता हैवो घर ,उसमे रहने वाले हर इंसान का हैयहाँ तक की घर के पालतुओं का भीपर वो घर उसका नहीं है ......पराई बेटी है बात छुपाकर रखोकल की आई लड़की है सलाह न(...)'
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शर्तों वाला प्यार भाग 2
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 10-01-2013 19:04:00
'कहानी के पिछले हिस्से में हमने जाना निशा के बारे में ..कैसे वो दिल्ली आई ....भाग 2दॊ इंसान कभी एक जैसे नहीं होते वैसे तो कहा जाता है सबका कोई न कोई हमशक्ल होता है ,पर हमशक्ल भी एक जैसे नहीं होते .और सारी दिखने वाली बाते शायद एक सी हो भी सकती है पर इंसानी फितरत और हर बात को लेकर उनका नजरिया अलग अलग होता है यही कुछ अनदेखी पर सबसे ज्यादा जरूरी चीज़ें हर इंसान को एक दुसरे से अलग बनाती है ।प्यार के बारे में अलग अलग नजरिया ही अंशुल और निशा को एक दूसरे से अलग खड़ा करता था वैसे तो दोनों में(...)'
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शर्तों वाला प्यार (Love with conditions)
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 12-12-2012 12:23:00
'दिसंबर की वो ठंडक सारे शहर को जमाए दे रही थी पर वो आधी रात तक अपने होस्टल की छत पर खड़ी कंपकपाते होंठो ठिठुरते हाथो में फोन लिए उससे बात करती , एक स्वेटर पहने या शाल ओढे वो कहती सुनती रहती और सोचती प्रेम की ऊष्मा सच में गजब की होती हैतरफ एक तरफ जहा पेड़ पोधे भी ठण्ड के मारे ऐसे सिकुड़ जाते जेसे सर्दियों का ये मौसम सबमे कुमुदिनी के गुण बाँट रहा हो ,वहीँ दूसरी तरफ वो कुमुदिनी की तरह खिल उठती .....कभी कभी प्यार सिर्फ इसलिए नहीं होता की दिल को कोई अच्छा लगे या &n(...)'
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बदलते बच्चे बिखरता बचपन
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: kanupriya
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 05-12-2012 16:40:00
'मुझे चाँद खिलौना ला दो माँ ,मुझे तारों तक पहुंचा दो माँपापा प्यारी गुडिया ला दो, छोटा बेलन चकला ला दोएक प्यारी सी चुनरी ला दो,मैं पहन उसे नाचूंगी माँमुझे चाँद खिलौना ला दो माँ ......हमारा बचपन कुछ इसी तरह का था और शायद आज से २० से २५ साल पहले लगभग सभी बच्चो का बचपन कुछ एसा ही मासूमियत भरा था.बच्चे बिलकुल ओंस की बूंदों जेसे हुआ करते थे निश्चल , भोले और मासूम.पर अब बचपन वेसा नहीं बचा आजकल के बच्चे बाली उम्र में ही जाने कब जवान लोगो की तरह व्यवहार करने लगते है पता भी नहीं चलता .जिन विष(...)'
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बदलते बच्चे बिखरता बचपन
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 04-12-2012 19:12:00
'मुझे चाँद खिलौना ला दो माँ ,मुझे तारों तक पहुंचा दो माँ पापा प्यारी गुडिया ला दो, छोटा बेलन चकला ला दो एक प्यारी सी चुनरी ला दो,मैं पहन उसे नाचूंगी माँ मुझे चाँद खिलौना ला दो माँ ......हमारा बचपन कुछ इसी तरह का था और शायद आज से २० से २५ साल पहले लगभग सभी बच्चो का बचपन कुछ एसा ही मासूमियत भरा था.बच्चे बिलकुल ओंस की बूंदों जेसे हुआ करते थे निश्चल , भोले और मासूम.पर अब बचपन वेसा नहीं बचा आजकल के बच्चे बाली उम्र में ही जाने कब जवान लोगो की तरह व्यवहार करने लगते है पता भी नहीं चलता .जिन (...)'
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बदलते बच्चे बिखरता बचपन
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 04-12-2012 19:12:00
'मुझे चाँद खिलौना ला दो माँ ,मुझे तारों तक पहुंचा दो माँ पापा प्यारी गुडिया ला दो, छोटा बेलन चकला ला दो एक प्यारी सी चुनरी ला दो,मैं पहन उसे नाचूंगी माँ मुझे चाँद खिलौना ला दो माँ ......हमारा बचपन कुछ इसी तरह का था और शायद आज से २० से २५ साल पहले लगभग सभी बच्चो का बचपन कुछ एसा ही मासूमियत भरा था.बच्चे बिलकुल ओंस की बूंदों जेसे हुआ करते थे निश्चल , भोले और मासूम.पर अब बचपन वेसा नहीं बचा आजकल के बच्चे बाली उम्र में ही जाने कब जवान लोगो की तरह व्यवहार करने लगते है पता भी नहीं चलता .जिन (...)'
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बदलते बच्चे बिखरता बचपन
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 04-12-2012 19:09:00
'मुझे चाँद खिलौना ला दो माँ ,मुझे तारों तक पहुंचा दो माँ पापा प्यारी गुडिया ला दो, छोटा बेलन चकला ला दो एक प्यारी सी चुनरी ला दो,मैं पहन उसे नाचूंगी माँ मुझे चाँद खिलौना ला दो माँ ......हमारा बचपन कुछ इसी तरह का था और शायद आज से २० से २५ साल पहले लगभग सभी बच्चो का बचपन कुछ एसा ही मासूमियत भरा था.बच्चे बिलकुल ओंस की बूंदों जेसे हुआ करते थे निश्चल , भोले और मासूम.पर अब बचपन वेसा नहीं बचा आजकल के बच्चे बाली उम्र में ही जाने कब जवान लोगो की तरह व्यवहार करने लगते है पता भी नहीं चलता (...)'
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द्वार से उकता गया है देहरी का मन
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 31-10-2012 07:34:00
'आसमान के इस कोने से लेकर उस छोर तक वो हर रोज उसके आने की उम्मीद लगाती है ...हर सुबह उठकर उम्मीद की डोर बांधती है दोनों छोर के बीच ....और सुखा देती है कुम्हलाए सपने ,बिसुरती यादें , अलसाए प्रेम गीत ,बस ये सोचकर की समय की सीलन कही इनकी चमक ना कम दे ... नहीं मानती वो की धरती गोल है क्यूंकि धरती जो गोल ही होती तो वो लौटकर उसके पास जरुर आता ...जरूर ....कुछ छोटी छोटी कविताएँ या पंक्तिया फेसबुक पेज से 1 . एक प्रारंभ सेएक प्रारब्ध(...)'
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शेक्सपीयर का जुलियस सीज़र बनाम अन्ना और उनका पी आर
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 25-09-2012 08:51:00
'शेक्सपीयर का लिखा जुलियस सीज़र पढ़ रही थी कल रात ...पूरा नाटक नहीं कहानी रूपांतरण पढ़ा मैंने और पढने के बाद अलग अलग कई विचार मन में आए सबसे पहले तो जिन लोगो ने इस नाटक को नहीं पढ़ा (मेरे जेसे कई लोग होंगे क्यूंकि मेने कल पहली बार ही पढ़ा ) वो जान ले की पूरी कहानी सीज़र की रोम विजय और उसके विरुद्ध षड़यंत्र रचने वाले विद्रोहियों के आस पास घूमता है ,उसके अपने खास लोग उसे खून से नहला देने में कसर नहीं छोड़ते और उसका खास विश्वासपात्र ब्रूटस ही उसके खून से अपने हाथ र(...)'
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है बड़ा प्यारा हमारा प्रेम
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: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 24-09-2012 07:56:00
'गाहे बगाहे याद आ जाता है यूँ दर्द का ढाला बिचारा प्रेम...है यहाँ सारे सिपहसालार और विरह का मारा हमारा प्रेमवो कभी जो इश्क के उस्ताद थे लगता उन्हें अपना आवारा प्रेम छोड़ दे कैसे बीच मझधार में नाज़ से पाला संवारा प्रेम हो भले सबकी आँखों की किरकिरी अपनी आँख का तारा ,हमारा प्रेम उथला नहीं बहता भरे बाज़ार मेंगहराई में हमने उतारा प्रेम चाँद की ख्वाहिश ना खुशियों की तलब दरवेश बंजारा हमारा प्रेम&nbs(...)'
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उन बेवफाओं के किए क्या दिल लगाना छोड़ दे ?
Author
: kanu.....
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: parwaz परवाज़.....
Date
: 21-09-2012 07:21:00
'जो छोड़कर जाते हैं अपने इश्क को मझधार में उन बेवफाओं के किए क्या दिल लगाना छोड़ दे ?जिन रास्तों ने ज़ख्म देकर पैरों को घायल किया जब वो ना फितरत छोड़े अपनी तो हम क्यों उन रास्तों पर जाना छोड़ दे ?हे इश्क वो दाता जिसने भटकती रूह सा जीवन दिया और वो कहते हैं की हम इश्क से खौफ खाना छोड़ दे वो कहते हैं हमसे सरेराह यूँ नशे में चलना बंद करो हमें डर हैं मोहब्बत की खुमारी के उतर जाने का गर साथ वो अपने ह(...)'
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