कहानी में सब कुछ सुपरिचित सा लगा पर उन जोड़ों का क...
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Article : निचाट मरुभूमि के लिए अभिशापित प्रेम...!
Commented Date: 4/11/2013 12:35:00 AM
कहानी में सब कुछ सुपरिचित सा लगा पर उन जोड़ों का कैक्टस में बदल जाना समझ में नहीं आया.आपने इसकी व्याख्या करने की कोशिश की है, जो सही ही लग रही है.पर अर्जेंटीना की इस कहानी का उद्देश्य, प्रेम विवाह को हतोत्साहित करना तो नहीं...इस कहानी के माध्यम से यह सन्देश दिया जा रहा हो कि अगर 'पिता की मर्जी के खिलाफ शादी किया तो कैक्टस में बदल सकते हो '
तीसरे पक्ष बतौर हालात को समझने वाले, चीखे चिल्लाये...
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Article : परिंदों के जागने से पहले के ख्वाब...!
Commented Date: 11/16/2012 10:32:37 AM
तीसरे पक्ष बतौर हालात को समझने वाले, चीखे चिल्लाये ,तकरीरें करें , खुली आँखों से या बंद आँखों से ख्वाब देखें...कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।जबतक या तो वे मालिक नहीं बन जाते या फिर फसलों के बीच खड़े हो उन बेमुरव्वत जानवरों को सींग से पकड़ कर निकाल बाहर नहीं करते । आप तो बड़े अर्थपूर्ण ख्वाब देख लेते हैं। ख्वाब तो हमें भी नहीं आते,न खुशनुमा न खौफनाक न अर्थपूर्ण :(
दुख तो ह्रदय से कभी जाता नहीं...पर उसे भुलाकर या क...
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Article : नन्हे बिस्तर की नींद ...!
Commented Date: 10/6/2012 10:29:24 AM
दुख तो ह्रदय से कभी जाता नहीं...पर उसे भुलाकर या कहें अन्तःस्थल में छुपा कर जीना ही पड़ता है. इसीलिए मन की शान्ति के लिए ,ये सारे तर्क गढ़े जाते हैं कि मृतक की आत्मा को शान्ति नहीं मिलेगी...उसे मुक्ति नहीं मिलेगी.कहानी की माँ ने पहले भी यह सब सुन रखा होगा...इसीलिए उसके मस्तिष्क ने उसे इस रूप में सब समझाया.अत्यंत मार्मिक कहानी .
@सूर्य की बरौनियां यानि कि सूर्य रश्मियां
ये कुछ ...
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Article : सूर्य पुत्र...!
Commented Date: 9/28/2012 2:16:47 PM
@सूर्य की बरौनियां यानि कि सूर्य रश्मियां ये कुछ नया पता चला...:)कोई भी कहानी पढ़ते ही मेरे दिमाग में चलने लगता है...यह क्यूँ लिखी गयी होगी??...क्या विचार सूत्र होंगे??...और एक ख्याल ये आया कि जानवरों के अलग-अलग रंग और सूरज की गर्मी देखकर कुछ ऐसी कल्पना की गयी होगी कि कुछ जानवर गुफा में छुप कर सफ़ेद रह गए...कुछ झुलस कर काले पड़ गए..आदि आदि..
दुख तो ये है कि ये एक लोक आख्यान है...अब तक स्थिति...
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Article : कस्तूरी कुण्डल बसै...!
Commented Date: 9/22/2012 12:01:05 AM
दुख तो ये है कि ये एक लोक आख्यान है...अब तक स्थितियाँ बदल जानी चाहिए थीं...पर ऐसा हुआ नहीं...आज भी स्त्रियाँ अपने मन से कोई निर्णय ले लें तो उन्हें उसकी सजा भुगतनी पड़ती है.पर अनीता जॉन्सन का ये कथन कुछ सही प्रतीत नहीं हुआ,," और इसीलिये ( अनभिज्ञता के कारण ) वे खाने और वज़न घटाने के आनंद में लीन बनी रहती हैं ! "अगर उन्हें इसमें ही सुख मिलता है और अपनी मर्जी से ऐसा करती हैं...तो इसकी आलोचना नहीं की जानी चाहिए .
"यह देखना अत्यंत रोचक है कि स्वप्न को देखने व...
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Article : पवित्र धरोहर के संरक्षक...!
Commented Date: 9/16/2012 1:55:03 PM
"यह देखना अत्यंत रोचक है कि स्वप्न को देखने वाला हर जीव , नव स्वप्न की व्याख्या स्वयं नहीं करता / या कहें कि स्वयं को इस हेतु असमर्थ पाता है , उसकी अपनी आकांक्षा पुराने स्वप्न / ज्ञान पर टिके रहने तक सीमित बनीं रहती है" यही सिलसिला अब तक नहीं बना हुआ है?..यानि सपने देखने का रहस्य अब तक सुलझाने में असमर्थ है...पर सपने देखने , उसे विश्लेषित करने और उसके कार्यान्वयन में ही मानव का विकास भी निहित है.