एक ही कबीले के होने के बाद भी विरोध का कारण आर्थिक...
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:ummaten
Article : निचाट मरुभूमि के लिए अभिशापित प्रेम...!
Commented Date: 4/9/2013 1:59:36 AM
एक ही कबीले के होने के बाद भी विरोध का कारण आर्थिक चिंता ही अधिक हो सकती है परिवार की अभिलाषाओं के विरुद्ध जाने का दंड विवाहित दम्पत्तियों को भी मिल सकता है , प्रेम विवाह हो यां अरेंज :)आपका आकलन सटीक होता है !!
हमदर्द फूल , नन्ही परी ...दुखी होकर भी कितनी सुखी ...
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Article : अज मुंसफ होजा सोणियां...!
Commented Date: 3/11/2013 1:37:11 AM
हमदर्द फूल , नन्ही परी ...दुखी होकर भी कितनी सुखी है , क्या नहीं दिया उसने धरती को और फूलों ने उसको .कथा समझे बिना पढने में भी बहुत मीठी सी लगी :)
मोहरे बनी हुए स्त्री जब खुद चाल चलती है , बहुत खतर...
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Article : देव नृप सुता...!
Commented Date: 2/26/2013 11:05:01 PM
मोहरे बनी हुए स्त्री जब खुद चाल चलती है , बहुत खतरनाक हो जाती है ...ऐसी भी कोई कथा है क्या !!!
टेलीपैथी !
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Article : जुगनू...!
Commented Date: 12/28/2012 11:57:16 AM
टेलीपैथी !
शोक की घडी में यह कहकर चुप करवाया जाता रहा है कि ...
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Article : नन्हे बिस्तर की नींद ...!
Commented Date: 10/6/2012 12:20:55 AM
शोक की घडी में यह कहकर चुप करवाया जाता रहा है कि जितने तुम्हारे आंसू निकलेंगे , उनके लिए खून की धार होगी. उलझन होती है इस विषय पर क्या कहा जाए ...जिसका दर्द ,वही समझता है !!
यह सही है कि अपना दर्द स्वयं को ही सहना पड़ता है ,...
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:sada-srijan
Article : एक बांध सब्र का ...
Commented Date: 10/5/2012 3:24:11 AM
यह सही है कि अपना दर्द स्वयं को ही सहना पड़ता है , मगर कई बार ऐसा होता है कि संवेदनशील व्यक्ति उस दर्द से गुजारने वाले से ज्यादा दुखी होता है ...बहुत कुछ अपनी संवेदनाओं पर भी निर्भर है !दर्द और सोच की गहन अभिव्यक्ति !
नियति को बदला तो नहीं जा सकता , बस साहस से उसका सा...
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:ummaten
Article : नियतिवाद...!
Commented Date: 10/3/2012 2:12:51 AM
नियति को बदला तो नहीं जा सकता , बस साहस से उसका सामना किया जा सकता है !मृत्युभय से बाज(?) के पंखों पर बैठ सुदूर गुफा में छिपने जा रहे खरगोश (या ऐसे ही किसी जीव ) को गुफा के द्वार पर बाघ द्वारा मारे जाने की ऐसी ही एक कुछ याद कुछ भूली हुई कथा याद आई .
एक इंसान तब तक नहीं मरता जब तक कि उसे भुला ना दिया...
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Article : मृत्यु ...!
Commented Date: 9/23/2012 10:58:14 PM
एक इंसान तब तक नहीं मरता जब तक कि उसे भुला ना दिया जाये ! कई बार प्रियजनों का विश्वास मौत के मुंह से खींच लाता है . स्मृतियों में तो खैर मनुष्य मर कर भी नहीं मरता .कथा का सन्देश वास्तविक और प्रभावी है .
रिश्तों की मजबूती उनके पोषण में ही तो अन्तर्निहित ...
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:ummaten
Article : कस्तूरी कुण्डल बसै...!
Commented Date: 9/22/2012 12:01:05 AM
रिश्तों की मजबूती उनके पोषण में ही तो अन्तर्निहित है . यह दबाव/जबरदस्ती/सोशल कंडिशनिंग के कारण नहीं बल्कि प्रेम के कारण हो तो क्या हर्ज़ है !!! लोक आख्यानो में ही स्त्रियों की आज़ादी के अनेक प्रतीक , बिम्ब अथवा सुझाव दिख जाते हैं , जो वास्तव में कथाओं जितने ही सुहाने हो भी सकते हैं और नहीं भी !
प्रत्येक आत्मा परमात्मा का अंश है , इसलिए उसके संर...
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:ummaten
Article : पवित्र धरोहर के संरक्षक...!
Commented Date: 9/16/2012 3:58:06 AM
प्रत्येक आत्मा परमात्मा का अंश है , इसलिए उसके संरक्षण , विकास का जिम्मा भी आत्माओं का ही है . वतमान समय के परिप्रेक्ष्य में यथार्थवादी इसे स्वीकार ना भी करें , मगर सत्य यही है . पंचभूत से बने शरीर का प्रकृति में समा जाने जैसा ही !
किताबें ही सबसे अच्छी मित्र हो सकती है , कुछ पूछती...
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:sada-srijan
Article : जिंदगी की तरह ...
Commented Date: 9/14/2012 11:43:05 PM
किताबें ही सबसे अच्छी मित्र हो सकती है , कुछ पूछती नहीं , सिर्फ बताती हैं :)