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अर्जुन की प्रतिज्ञा ( Arjun Ki Pratigya) - मैथिलीशरण गुप्त ( Maithilisharan Gupt)

Author:Avnish Anand      Blog :हिन्दी कविता (Hindi Poetry)    Date: 17-09-2010 07:57:00

उस काल मारे क्रोध के तन काँपने उसका लगा,मानों हवा के वेग से सोता हुआ सागर जगा ।मुख-बाल-रवि-सम लाल होकर ज्वाल सा बोधित हुआ,प्रलयार्थ उनके मिस वहाँ क्या काल ही क्रोधित हुआ ?युग-नेत्र उनके जो अभी थे पूर्ण जल की धार-से,अब रोश के मारे हुए, वे दहकते अंगार-से ।निश्चय अरुणिमा-मिस अनल की जल उठी वह ज्वाल ही,तब तो दृगों का जल गया शोकाश्रु जल तत्काल ही ।साक्षी रहे संसार करता हूँ प्रतिज्ञा पार्थ मैं,पूरा करूँगा कार्य सब कथानुसार यथार्थ मैं ।जो एक बालक को कपट से मार हँसते हैँ अभी,वे शत्रु सत्वर श(...)

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मिड लाईफ क्रायसिस (Mid Life Crisis)

Author:shekhar athavale      Blog :Blogger Aksharadhool    Date: 25-12-2011 01:31:00

चार महिन्याच्या कालावधीनंतर पुण्याला परत आल्यावर काही धक्कादायक बातम्या कानावर पडल्या. मी काही या बातम्या खर्‍या की खोट्या याची शहानिशा करण्याच्या भानगडीत पडलो नाही. एकतर या असल्या बातम्या बहुदा खर्‍याच असतात व दुसरे म्हणजे या बाबतीत चौकशा सुरू करून दुसर्‍यांच्या भानगडीत नाक खुपसू पाहणारा असे बिरूद मला माझ्यावर अजिबात लावून घेण्याची इच्छा नाही. पण या दोन बातम्या प्रत्येक सर्व साधारण माणसाच्या आयुष्यात येणार्‍या एका संक्रमणाशी निगडित असल्याने त्याचा उल्लेख मी येथे करतो आहे इतके(...)

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कृष्ण की चेतावनी (Krishna Ki Chetawani)

Author:Avnish Anand      Blog :हिन्दी कविता (Hindi Poetry)    Date: 08-09-2010 19:01:00

वर्षों तक वन में घूम घूमबाधा विघ्नों को चूम चूमसह धूप घाम पानी पत्थरपांडव आये कुछ और निखरसौभाग्य न सब दिन होता हैदेखें आगे क्या होता हैमैत्री की राह दिखाने कोसब को सुमार्ग पर लाने कोदुर्योधन को समझाने कोभीषण विध्वंस बचाने कोभगवान हस्तिनापुर आएपांडव का संदेशा लायेदो न्याय अगर तो आधा दोपर इसमें भी यदि बाधा होतो दे दो केवल पाँच ग्रामरखो अपनी धरती तमामहम वहीँ खुशी से खायेंगेपरिजन पे असी ना उठाएंगेदुर्योधन वह भी दे ना सकाआशीष समाज की न ले सकाउलटे हरि को बाँधने चलाजो था असाध्य साधने चलाजब(...)

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హాలాహల భక్షణమ్

Author:పంతుల జోగారావు      Blog :కథా మంజరి    Date: 25-12-2011 02:35:00

నవ్య వార పత్రికలో తెలుగు పద్యం వెలుగు జిలుగులు శీర్షికన వచ్చిన కొన్ని పద్యాలను కథా మంజరిలో లోగడ ప్రచురించాను. ఇప్పుడు దీనిని చూడండి. తే 07-12-20110 దీ నవ్య వార పత్రికలో ప్రచురణ.Open publication - Free publishing - More jogh

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